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Narak Chaturdashi 2020: नरकासुर के अवसान का पर्व है नरक चौदस

By Pt. Gajendra Sharma
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Narak Chaturdashi 2020: भारत में सबसे महत्वपूर्ण पांच दिवसीय महोत्सव दीपावली का त्योहार ढेर सारी कथाओं और प्रसंगों का साक्षी है। दीप पर्व का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी या नरक चौदस के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, यह त्योहार दैत्यराज नरकासुर से जुड़ा है। ध्यान देने वाली बात ये है कि उत्तर भारत में नरक चौदस पर भगवान श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की कथा प्रचलित है। वहीं जब हम दक्षिण भारत की बात करें, तब इस कथा में भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि का प्रसंग आता है।

Narak Chaturdashi 2020: नरकासुर के अवसान का पर्व है नरक चौदस

आज इन दोनों ही कथाओं के बारे में जानते हैं

उत्तर भारत की कथा की बात करें, तो द्वापर युग में एक महा शक्तिशाली असुर का उल्लेख मिलता है। इसका नाम था नरकासुर और इसकी क्रूरता की कोई सीमा नहीं थी। महा बलशाली नरकासुर को यह वरदान मिला था कि उसे कोई स्त्री ही परास्त कर सकती है। इसी कारण देवता उसे परास्त नहीं कर पा रहे थे और उसने स्वर्ग पर भी अधिकार कर लिया था। नरकासुर ने 16 हज़ार युवतियों को बंधक बना रखा था। वह इन युवतियों की बली देकर अमरत्व प्राप्त करना चाहता था। इसीलिए श्री कृष्ण ने कार्तिक मास की चतुर्दशी को अपनी पत्नी सत्यभामा के नेतृत्व में नरकासुर से प्रचण्ड युद्ध किया और उसे मार कर सभी युवतियों को स्वतंत्र करवाया। इसी असुर के नाम पर इस दिन को नरकचौदस कहा जाने लगा।

लोकप्रिय सम्राट राजा बलि से जुड़ी है कहानी

दक्षिण भारत की कथा वहां के लोकप्रिय सम्राट राजा बलि से जुड़ी है। राजा बलि महाशक्तिशाली था और असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद वह हर तरह से सुसंस्कृत था। वह अपनी प्रजा का ध्यान रखता था और भगवान का भक्त भी था। उसने अपने बल पर धरती, स्वर्ग और पाताल पर भी अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी। इसीलिए देवताओं को स्वर्ग वापस दिलाने के लिए श्री विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। उन्होंने यज्ञ के समय याचक बनकर बलि से तीन पग भूमि मांगी और केवल 2 पग में सम्पूर्ण धरती, स्वर्ग और पाताल नाप लिया। भगवान का भक्त होने के नाते बलि तुरंत समझ गया कि स्वयम हरि विष्णु पधारे हैं। उसने तीसरा पग रखने के लिए अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु उस पर अत्यधिक प्रसन्न हुए और वर मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा कि जब तक यह पृथ्वी है, तब तक आज से तीन दिन हर काल में यहाँ मेरा ही राज्य हो। इन तीन दिनों में जो मेरी पूजा करे, यमराज भी उसे त्राण न दे सकें। उस दिन चतुर्दशी तिथि ही थी। इस तरह दक्षिण भारत में राजा बलि की याद में नरक चौदस धूमधाम से मनाने का प्रचलन प्रारम्भ हुआ।

यह पढ़ें: Narak Chaturdashi 2020: नरक चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान?

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English summary
Narak Chaturdashi 2020 will celebrated on 14th November, Read Narakasura story on Narak Chaturdashi.
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