Mokshada Ekadashi 2024: क्या है मोक्षदा एकादशी का मतलब? कब करेंगे पारण? जानिए सबकुछ

Mokshada Ekadashi 2022 Muhurat (मोक्षदा एकादशी व्रत): मार्गशीष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं, हिंदू धर्म में इस एकादशी का बहुत महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की खास पूजा करना चाहिए , उनकी पूजा करने से इंसान को सुख-शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है और इसी कारण इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।

Mokshada Ekadashi 2024:

मुहूर्त

एकादशी तिथि का प्रारंभ 22 दिसंबर यानी आज सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर हो गया है और इसका समापन 23 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। इस बीच किसी भी वक्त भगवान विष्णु की पूजा की जा सकती है।

पारण की टाइमिंग

23 दिसंबर 2023 को सुबह 7 बजकर 49 मिनट पर व्रत का पारण करें।

पूजा विधि

  • सबसे पहले नहा-धोकर स्वच्छ कपड़े धारण करें।
  • इसके बाद अगर आप उपवास रख रहे हैं तो संकल्प लीजिए।
  • अपने पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति रखें।
  • फिर उसे कुमकम,रोली, धूप, दीप सिंदूर, तुलसी के पत्ते, फूल, खीर , प्रसाद चढ़ाएं।
  • एकादशी की कथा सुनें।
  • आरती करें। प्रसाद बांटे।
  • दान-पुण्य करें।

खास बातें

  • विष्णु जी प्रिय हैं तुलसी, आज के दिन तुलसी पर घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए।
  • तुलसी की 21 बार परिक्रमा करें।
  • ऐसा करने से इंसान को यश-बल और धन की प्राप्ति कर लीजिए।

विष्णु जी की इन मंत्रों से करें पूजा

  • ॐ अं वासुदेवाय नम:
  • ॐ आं संकर्षणाय नम:
  • ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:
  • ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:
  • ॐ नारायणाय नम:
  • ॐ विष्णवे नम:
  • ॐ हूं विष्णवे नम:
  • ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
  • श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
  • ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

श्री हरि स्तोत्रम्

  • जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं
  • शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं
  • नभोनीलकायं दुरावारमायं
  • सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं ॥
  • सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासं
  • जगत्सन्निवासं शतादित्यभासं
  • गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रं
  • हसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं ॥
  • रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं
  • जलान्तर्विहारं धराभारहारं
  • चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं
  • ध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं ॥
  • जराजन्महीनं परानन्दपीनं
  • समाधानलीनं सदैवानवीनं
  • जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुं
  • त्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं ॥
  • कृताम्नायगानं खगाधीशयानं
  • विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं
  • स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलं
  • निरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं ॥
  • समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशं
  • जगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं
  • सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहं
  • सुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं ॥
  • सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठं
  • गुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं
  • सदा युद्धधीरं महावीरवीरं
  • महाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं ॥
  • रमावामभागं तलानग्रनागं
  • कृताधीनयागं गतारागरागं
  • मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं
  • गुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं ॥8
  • फलश्रुति
  • इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तं
  • पठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:
  • स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकं
  • जराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो ॥

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