Merry Christmas 2021: कौन हैं Santa Claus? क्यों सजाते हैं 'क्रिसमस ट्री'?
नई दिल्ली, 24 दिसंबर। 'क्रिसमस' का पर्व खुशियों, उम्मीदों,जोश और मस्ती लेकर आता है। पूरे विश्व में धूम-धाम से मनाए जाने वाले इस त्योहार पर तीन चीजों का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं, खासकर के बच्चे। ये तीन चीजें हैं केक, Santa Claus और 'क्रिसमस ट्री'। प्रभु यीशु को याद करते हुए लोग घरों में केक बनाते हैं और 'क्रिसमस ट्री'को सजाते हैं।
चलिए जानते हैं इन सबके बारे में विस्तार से।

केक
सबसे पहले बात करते हैं केक की, दरअसल भारत हो या विश्व का कोई और देश, हर जगह जन्मदिन पर मुंह मीठा करने की प्रथा है। 25 दिसंबर को भी हम यीशु के जन्म की खुशी में मनाते हैं, यानी कि इस दिन यीशु का बर्थडे होता है और बर्थडे तो बिना केक के अधूरा होता है ना। यूरोप के देशो में मीठा के नाम पर केक ही परोसा जाता है इसलिए क्रिसमस पर खास तौर पर केक खाने और खिलाने की प्रथा है।

'क्रिसमस ट्री'
'क्रिसमस ट्री' केवल एक पेड़ नहीं है बल्कि आशाओं और उम्मीदों का ट्री होता है। ऐसा माना जाता है कि इस पेड़ को सजाने से घर से बुरी आत्माएं दूर होती हैं और अच्छी एनर्जी की एंट्री होती है। इसी वजह से लोगों ने इसे सजाना शुरू कर दिया। आधुनिक 'क्रिसमस ट्री' की शुरुआत पश्चिम जर्मनी में हुई थी। कल्पना की जाती है कि स्वर्ग में जहां प्रभु निवास करते हैं वहां पर ऐसी ही जगमग रोशनी होती होगी और पेड़ सो सितारे, फलों और गिफ्ट की बरसात होती होगी इसी वजह से क्रिसमस ट्री को सजाया जाता है।

प्रेम, आस्था, विश्वास का मानक है 'क्रिसमस ट्री'
वैसे आपको बता दें कि 'क्रिसमस वृक्ष' एक सदाबहार डगलस, बालसम या फर का पौधा होता है। अमेरिका के पेनिसिल्वानिया में सबसे पहले क्रिसमस ट्री की परंपरा शुरू हई थी और विडसर कैसल में पहला 'क्रिसमस ट्री' लगा था।

Santa Claus
अब बात उनकी, जिनके बिना क्रिसमस अधूरा है। जी हां हम बात कर रहे हैं Santa Claus की। 'संता क्लॉज' को कुछ लोग 'सपनों का बाबा' कहते हैं तो कुछ उन्हें गॉड का देवदूत कहते हैं। Santa Claus के जरिए हर बच्चा यही सोचता है कि उसकी हर अच्छी और बुरी बातों पर ईश्वर नजर रख रहा है और Santa Claus की पोटली उसकी हर इच्छा की पूर्ति कर देगी।
क्या Santa Claus सच में होते हैं?
लेकिन क्या Santa Claus सच में होते हैं? इस बात का स्पष्ट प्रमाण तो नहीं है लेकिन आपको बता दें कि आज से डेढ़ हजार साल पहले जन्मे संत निकोलस को असली संता माना जाता है।

संत निकोलस को यीशु का पिता कहते हैं
संत निकोलस का जन्म तीसरी सदी में जीसस की मौत के 280 साल बाद मायरा में हुआ। उन्होंने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया। बचपन से ही उनकी प्रभु यीशु में बहुत आस्था थी। वे बड़े होकर ईसाई धर्म के पादरी और बाद में बिशप बने। उनका और जीसस का डायरेक्ट रिलेशन तो नहीं रहा लेकिन कुछ लोग उन्हें यीशु का पिता मानते थे। जो अपने बच्चे को क्रिसमस पर गिफ्टे देता है क्योंकि यीशु का जन्मदिन क्रिसमस पर होता है।
सिंटर क्लास' को ही Santa Claus कहते हैं
संत निकोलस बच्चों से बहुत प्यार करते थे और अक्सर गरीब बच्चों को प्यारे-प्यारे गिफ्ट दिया करते थे वो भी लाल रंग की टोपी लगाकर। वो पादरी थे इसलिए उनका कपड़ा सफेद रहता था इसी वजह से लोगों ने कल्पना से Santa Claus को Red-White रूप दे दिया, जो क्रिसमस पर बच्चों को प्यार के साथ गिफ्ट बांटता है। आपको बता दें कि निकोलस के डच नाम 'सिंटर क्लास' को ही Santa Claus कर दिया गया है।












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