Mauni Amavasya 2024: मौनी अमावस्या पर क्यों रहते हैं मौन? जानिए क्या करें और क्या ना करें?

Mauni Amavasya 2024 (Do-Donts): आज पूरी दुनिया मौनी अमावस्या मना रही है, सुबह से ही काशी-प्रयागराज, हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों में लोग पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।

 Mauni Amavasya 2024

आज का दिन बड़ा पावन है, माना जाता है कि आज के दिन जो भी पवित्र नदियों में स्नान करके दान-पुण्य करता है तो उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है, यही नहीं इंसान के अकाल मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है।

अक्सर लोगों को मन में ये बात आती है कि आखिर इस अमावस्या को मौनी अमावस्या क्यों कहते हैं? तो दरअसल इसके पीछे एक गूढ़ कारण ये है। दरअसल मौनी अमावस्या अपनी इंद्रियों को वश में करने का संदेश देती है।

मनु ऋषि का जन्म भी आज हुआ था

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    Mauni Amavasya 2024: मौनी अमावस्या पर क्यों रहते हैं मौन? जानिए क्या करें और क्या ना करें?

    आज मौन रहकर इंसान अपनी वाणी और मन को नियंत्रित करता है, जो इंसान अपनी इंद्रियों को वश में कर सकता है उसे कोई भी कष्ट और परेशानी छू नहीं सकता है। वैसे आज का दिन इसलिए भी पावन है क्योंकि मनु ऋषि का जन्म भी आज हुआ था। माना जाता है कि सनातन धर्म के अनुसार मनु संसार के प्रथम योगीपुरुष थे।

    आज के दिन क्या करें और क्या ना करें ?

    • पवित्र नदियों में स्नान करें और चावल-दाल दान करें,ऐसा करने से घर से दरित्रता दूर होगी।
    • अगर आज आप पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें डालकर स्नान करें।
    • नहाने के दौरान किसी से बात ना करें और शांत रहे।
    • इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य जरूर दें।
    • पूरे दिन फलाहार करके शाम को विष्णु जी की पूजा करें और इसके बाद तुलसी माता के पास घी का दीपक जलाएगा।
    • अगर कोई सर्पदोष या चंद्रदोष से ग्रसित हैं को आज के दिन गौ-माता की पूजा करें और उन्हें दही खिलाएं।

    आज के लिए सूर्यदेव की आरती ( Mauni Amavasya 2024)

    • ऊँ जय सूर्य भगवान,
    • जय हो दिनकर भगवान ।
    • जगत् के नेत्र स्वरूपा,
    • तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
    • धरत सब ही तव ध्यान,
    • ऊँ जय सूर्य भगवान ॥
    • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
    • सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,
    • श्वेत कमलधारी ।
    • तुम चार भुजाधारी ॥
    • अश्व हैं सात तुम्हारे,
    • कोटी किरण पसारे ।
    • तुम हो देव महान ॥
    • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
    • ऊषाकाल में जब तुम,
    • उदयाचल आते ।
    • सब तब दर्शन पाते ॥
    • फैलाते उजियारा,
    • जागता तब जग सारा ।
    • करे सब तब गुणगान ॥
    • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
    • संध्या में भुवनेश्वर,
    • अस्ताचल जाते ।
    • गोधन तब घर आते॥
    • गोधुली बेला में,
    • हर घर हर आंगन में ।
    • हो तव महिमा गान ॥
    • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
    • देव दनुज नर नारी,
    • ऋषि मुनिवर भजते ।
    • आदित्य हृदय जपते ॥
    • स्त्रोत ये मंगलकारी,
    • इसकी है रचना न्यारी ।
    • दे नव जीवनदान ॥
    • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
    • तुम हो त्रिकाल रचियता,
    • तुम जग के आधार ।
    • महिमा तब अपरम्पार ॥
    • प्राणों का सिंचन करके,
    • भक्तों को अपने देते ।
    • बल बृद्धि और ज्ञान ॥
    • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
    • भूचर जल चर खेचर,
    • सब के हो प्राण तुम्हीं ।
    • सब जीवों के प्राण तुम्हीं ॥
    • वेद पुराण बखाने,
    • धर्म सभी तुम्हें माने ।
    • तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
    • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
    • पूजन करती दिशाएं,
    • पूजे दश दिक्पाल ।
    • तुम भुवनों के प्रतिपाल ॥
    • ऋतुएं तुम्हारी दासी,
    • तुम शाश्वत अविनाशी ।
    • शुभकारी अंशुमान ॥
    • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
    • ऊँ जय सूर्य भगवान,
    • जय हो दिनकर भगवान ।
    • जगत के नेत्र रूवरूपा,
    • तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ॥
    • धरत सब ही तव ध्यान,
    • ऊँ जय सूर्य भगवान ॥

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