Mauni Amavasya 2020: जानिए इस दिन क्यों रहते हैं मौन, क्या है इसके पीछे का कारण?
नई दिल्ली। आज मौनी अमावस्या है, वैसे तो अमावस्या प्रत्येक मास में पड़ती है, परन्तु माघ मास की अमावस्या का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ब्रहमा ने इसी दिन मनु और सतरूपा को उत्पन्न कर सृष्टि का निर्माण कार्य आरम्भ किया था, इस दिन मौन रहकर स्नान करने की प्रथा है।

क्या है मान्यता
माघ मास की अमावस्या योग पर आधारित महाव्रत है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है, कहते हैं ऐसा करने से इंसान समस्त पापों से दूर हो जाता है।
महत्व
शिवमहापुराण में माघ माह की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या का महत्व बताते हुए स्वयं भगवान शिव कहते हैं जो मनुष्य इस दिन गंगा, जमुना आदि सप्त नदियों में स्नान करके सच्चे मन से दान करता है उस पर समस्त ग्रह-नक्षत्रों की कृपा रहती है।

अमृत कलश
धार्मिक कथाओं के अनुसार जब सागर मंथन से भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए उस समय देवताओं एवं असुरों में अमृत कलश के लिए खींचा तानी शुरू हो गई थी, इससे अमृत की कुछ बूंदें छलक कर इलाहाबाद, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में जा गिरी थीं। यही कारण है कि यहां कि नदियों में स्नान करने पर पुण्य प्राप्त होता है।

इसलिए रहा जाता है आज के दिन 'मौन'?
मौनी शब्द मौन से उत्पन्न हुआ है यानी इस दिन मौन रहकर व्रत करना चाहिए। इस दिन अपने मन को काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि से दूर रखना चाहिए। चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करता है और अमावस्या के दिन आकाश में चंद्र दिखाई नहीं पड़ता। इसलिए मन की स्थिति इस दिन अत्यंत कमजोर रहती है। इसलिए मौन रहकर चंद्र को बल प्रदान किया जाता है। शास्त्रों का कथन है कि मौनी अमावस्या के दिन शिव और विष्णु दोनों की ही पूजा का समान रूप से करनी चाहिए।












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