Margashirsha Purnima : जानिए कब है सर्व सिद्धिदायक मलमास की पूर्णिमा, क्या है पूजा विधि?

Margashirsha or Malmas or Adhik Maas Purnima: मलमाल, खरमास या धनुर्मास में आने वाली पूर्णिमा को सर्व सिद्धिदायक कहा गया है। मलमास के अधिपति देवता भगवान श्रीहरि विष्णु होते हैं और पूर्णिमा का दिन भी भगवान विष्णु की पूजा, आराधना का दिन होता है। इसलिए मलमाल की पूर्णिमा का व्रत रखकर इस दिन सत्यनारायण व्रत कथा करने से जीवन के समस्त संकटों से छुटकारा मिल जाता है। आश्विन माह की यह पूर्णिमा 30 दिसंबर बुधवार को आ रही है, लेकिन व्रत की पूर्णिमा एक दिन पूर्व 29 दिसंबर मंगलवार को रहेगी। इस दिन रवियोग का भी शुभ संयोग बन रहा है। इसलिए सत्यनारायण व्रत करने से सुख-सौभाग्य, भौतिक सुखों में वृद्धि होगी।

जानिए कब है सर्व सिद्धिदायक मलमास की पूर्णिमा?

पूर्णिमा के ग्रह योग

मलमास की पूर्णिमा का व्रत 29 दिसंबर को किया जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि प्रात: 7 बजकर 53 मिनट से प्रारंभ होगी जो अगले दिन 30 दिसंबर को प्रात: 8 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। इसलिए व्रत 29 दिसंबर को ही किया जाएगा। 29 दिसंबर को मृगशिरा नक्षत्र और शुक्ल योग रहेगा। रवियोग का संयोग इस दिन को खास बना रहा है। इस दिन चंद्र मिथुन राशि में और सूर्य धनु राशि में रहेगा। चंद्रोदय का समय सायं 5.12 बजे रहेगा। 29 दिसंबर को ही भगवान दत्तात्रेय की जयंती भी मनाई जाएगी।

कैसे करें पूर्णिमा व्रत

29 दिसंबर को प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत होकर भगवान सूर्यदेव को जल का अ‌र्घ्य अर्पित करें। पूजा स्थान को साफ-स्वच्छ करके नित्य की जाने वाली पूजा करें। फिर सत्यनारायण व्रत का संकल्प लें। यह संकल्प काम्य और अकाम्य दोनों प्रकार से लिया जा सकता है। काम्य अर्थात् यदि आप अपने किसी विशेष कार्य की सिद्धि के निमित्त व्रत कर रहे हैं तो संकल्प के साथ वह कार्य पूरा होने की कामना भगवान विष्णु से करें। इसके बाद दोपहर में 12 बजे से पूर्व पूजा करें। इसके लिए एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान लक्ष्मीनारायण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। चौकी के दोनों ओर केले के पत्ते सजाएं। इसके बाद षोडशोपचार पूजन संपन्न करके भगवान को पंचामृत, केले, हलवे का भोग लगाएं। सत्यनारायण व्रत की कथा पढ़ें या सुनें, आरती करें। पूरे दिन निराहार रहते हुए शाम को चंद्र के दर्शन करें, अ‌र्घ्य दें।

पूर्णिमा व्रत के लाभ

  • पूर्णिमा का व्रत जीवन के समस्त भोग, ऐश्वर्य, सुख, संपत्ति प्रदान करने में सहायक है।
  • भगवान लक्ष्मीनारायण की कृपा से घर-परिवार में धन-धान्य के भंडार भरे रहते हैं।
  • उत्तम वर की कामना से यह व्रत करने वाली युवतियों की मनोकामना पूरी होती है।
  • यह व्रत शीघ्र फल देने वाला है। जिस कामना से किया जाए वह अवश्य पूरी होती है।
  • जन्मकुंडली में चंद्र के बुरे प्रभाव इस व्रत से दूर होते हैं।
  • चंद्र की पीड़ा दूर करने के लिए इस दिन चंद्र यंत्र भी स्थापित किया जाता है।

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