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माघ माह में इस मंदिर का प्रसाद शरीर पर लगाने से मिलती है चर्म रोग, जोड़ों के दर्द से मुक्ति!

By Rajeevkumar Singh
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    शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्थित ब्रजेश्वरी मंदिर विश्व में शायद अकेला मंदिर होगा, जहां माघ माह के दौरान चढ़ने वाले प्रसाद को श्रद्धालु खा नहीं सकते लेकिन इसी प्रसाद को अपने शरीर पर लगाते हैं, तो ऐसा बताया जाता है कि उनके चर्म रोग व जोड़ों के दर्द दूर हो जाते हैं।

    Makar Sankranti prasad of Himachal temple for treatment of skin disease

    कांगड़ा नगर में ब्रजेशवरी मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर शुरू हुये घृत मंडल पर्व में करीब एक क्विंटल 600 किलोग्राम मक्खन व देसी घी को लेप मंदिर में स्थापित पिंडी में लगाया जायेगा व बीस जनवरी को यह पिंडी से जब उतारा जायेगा, तो श्रद्धालु इसे प्रसाद रूप में ग्रहण करेंगे। ऐसी मान्यता है कि यह प्रसाद रूपी लेप शरीर के चर्म रोगों और जोड़ों के दर्द रामबाण का काम करता है।

    यह परंपरा अनंत काल से चली आ रही है और बज्रेश्वरी मंदिर के इतिहास के मुताबिक जालंधर दैत्य को मारते समय माता के शरीर पर कई चोटें लगी थीं। इन्हीं घावों को भरने के लिए देवताओं ने माता के शरीर पर घृत (मक्खन) का लेप किया था। इसी परंपरा के अनुसार 101 किलो देसी घी को 101 बार शीतल जल से धोकर इसका मक्खन तैयार कर, इसे माता की पिंडी पर चढ़ाया जाता है।

    Makar Sankranti prasad of Himachal temple for treatment of skin disease

    मकर संक्रांति पर घृतमंडल पर्व को लेकर यह श्रद्धालुओं की ही आस्था है कि हर बार माता की पिंडी पर घृत की ऊंचाई बढ़ती जा रही है। मंदिर में घृत पर्व में माता की पिंडी पर मक्खन चढ़ाया जाता है। मां की पिंडी को फल मेवों, फूलों और फलों से सजाया जाता है। यह पर्व सात दिन चलता है। सातवें दिन माता की पिंडी से घृत उतारने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद घृत प्रसाद के तौर पर श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।

    आदि काल से चल रही परंपरा- बज्रेश्वरी मंदिर के वरिष्ठ पुजारी राम प्रसाद कहते हैं कि मंदिर में यह प्रथा आदि काल से चली आ रही है। घृत पर्व का प्रसाद चर्म और जोड़ों के दर्द में सहायक होता है। मंदिर में घृत प्रसाद के तौर पर श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। मंदिर के इतिहास पर छपी किताब में भी इस परंपरा का जिक्र है। घृत मंडल पर्व पर माता की पिंडी पर मक्खन चढ़ाने की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो जाती है।

    स्थानीय और बाहरी लोगों द्वारा मंदिर में दान स्वरूप देशी घी पहुंचाया जाता है। मंदिर प्रशासन इस घी को 101 बार ठंडे पानी से धोकर मक्खन बनाने के लिए मंदिर के पुजारियों की एक कमेटी का गठन करता है। पुजारियों की यही कमेटी मक्खन की पिन्नियां बनाती है और चौदह जनवरी को माता की पिंडी पर मक्खन चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

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    English summary
    Makar Sankranti prasad of Himachal temple for treatment of skin disease.

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