Mahavir Jayanti 2023: 'नजरिया बदलो दुनिया बदल जाएगी', पढ़ें प्रभु महावीर के 5 सिद्धांत और अनमोल विचार
Mahavir Jayanti 2023: अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, जैसे अनमोल विचार देने वाले भगवान महावीर की जयंती हर साल चैत्र माह में मनाई जाती है।

Mahavir Jayanti 2023: अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म मानने वाले भगवान महावीर की जयंती आज है, महावीर प्रभु जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर के रूप में पूजे जाते हैं। भगवान महावीर के विचार इंसान को आगे बढ़ने में मदद करते हैं। उन्होंने हमेशा कहा कि 'अगर आप नजरिए और विचार को बदलेंगे तो आपकी आधी समस्याओं का अंत अपने आप हो जाएगा।' आपको बता दें कि महावीर भगवान को 'वर्धमान', वीर', 'अतिवीर' और 'सन्मति' कहकर भी पुकारा जाता है।
72 वर्ष की अवस्था में इन्हें मोक्ष मिला था
इनका जन्म ईसा से 599 वर्ष पूर्व वैशाली के गणतंत्र राज्य क्षत्रिय कुण्डलपुर में हुआ था लेकिन इन्होंने मात्र तीस वर्ष की अवस्था में राज-पाट छोड़ दिया था और फिर इन्होंने पूरे 12 साल कठिन तपस्या करके ज्ञान की प्राप्त किया था, यही नहीं 72 वर्ष की अवस्था में इन्हें मोक्ष मिला था। इन्होंने पांच मूल मंत्र लोगों को सिखाए जो कि जैन धर्म के सिद्धांत बन गए।
ये पांच मंत्र निम्नलिखित हैं ...
- सत्य: सदा सत्य बोलो जहां 'सत्य' नहीं वहां 'धर्म' नहीं होता है, सत्य का मार्ग हमेशा कठिन होता है लेकिन यकीन मानिए ये ही आपको ईश्वर से साक्षात्कार कराता है।
- अहिंसा: जीव की हत्या ना करो, हर जीव के प्रति प्रेम-आस्था और दया दिखाओ, जो अंहिसा का पालन करना है वो ही सही मायने में धर्म का पालन करता है।
- अपरिग्रह: महावीर प्रभु ने कहा था कि ब्रह्मचर्य की उत्तम तपस्या है, यही तपस्या आपको मोक्ष की ओर लेकर जाती है।
- क्षमा: जो क्षमादान देना जानता है वो दुनिया का सर्वश्रेष्ठ इंसान है।
- अस्तेय: कभी भी चोरी नहीं करनी चाहिए।
- अपरिग्रह: जो आदमी सजीव या निर्जीव चीजों का संग्रह करता है, उसके दुखों का अंत होता ही नहीं है।
भगवान महावीर के अनमोल विचार
- हर आत्मा स्वतंत्र है। कोई भी दूसरे पर निर्भर नहीं करता है।
- सभी जीवों के प्रति दया भाव रखें। नफ़रत से विनाश होता है।
- स्वयं से लड़ो, बाहर दुश्मन से क्या लड़ना। वह जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेता है उसे आनंद की प्राप्ति होती है।
- एक लाख शत्रुओं पर जीत हासिल करने के बजाय स्वयं पर विजय प्राप्त करना बेहतर है।
- जीतने पर घमंड ना करें और ना हारने पर दुख।
- जिसने भय को पार कर लिया है, वह समभाव का अनुभव कर सकता है।










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