Madan Dwadashi 2025: उत्तम संतान चाहिए तो आज करें मदन द्वादशी का व्रत, जानिए पूजा विधि
Madan Dwadashi 2025:हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रत्येक समस्या का समाधान व्रतोपवास के माध्यम से दिया गया है। ऐसा ही एक व्रत है मदन द्वादशी व्रत। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन मदन द्वादशी व्रत किया जाता है। इसे विष्णु द्वादशी भी कहा जाता है।
मदन द्वादशी के दिन कामदेव का पूजन किया जाता है, जो उत्तम संतान सुख और चिरंजीवी संतान देने का आशीर्वाद देते हैं। यह व्रत इस बार 9 अप्रैल 2025 बुधवार को किया जाएगा।

मान्यता है कि प्राचीन काल में दैत्य माता दिति ने अपने पुत्रों की मृत्यु के बाद इस व्रत को करके पुन: पुत्रों की प्राप्ति की थी।
कैसे किया जाता है मदन द्वादशी व्रत (Madan Dwadashi 2025)
इस व्रत के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर अपनी दैनिक पूजा करने के बाद भगवान विष्णु और कामदेव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। जिन दंपतियों की संतान नहीं है वे संतान प्राप्ति की कामना पूरी होने का संकल्प लेकर व्रत करें।
मीठा गन्ना भोग के रूप में लगाएं
इसके बाद कामदेव का पूजन करें। उन्हें मीठा गन्ना भोग के रूप में लगाएं। गन्ना न मिले तो गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। इस व्रत में केवल फल खाए जाते हैं और जमीन पर बैठा या लेटा जाता है।
मदन द्वादशी के लाभ (Madan Dwadashi 2025)
- मदन द्वादशी व्रत करने से उत्तम संतान सुख की प्राप्ति होती है। विशेषकर पुत्र की प्राप्ति के लिए यह व्रत किया जाता है।
- जिन दंपतियों की संतानें होने के बाद अधिक समय तक जीवित नहीं रहती, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए।
पति-पत्नी में आपसी प्रेम में वृद्धि होती है
- जिन दंपतियों की कन्या संतानें हैं और वे पुत्र चाहते हैं, उन्हें भी यह व्रत करना चाहिए।
- संतानों की दीर्घायु और उनके चिरंजीवी रहने की कामना करने के लिए मदन द्वादशी का व्रत किया जाता है।
- इस व्रत के प्रभाव से पति-पत्नी में आपसी प्रेम में वृद्धि होती है। इसलिए दंपती को जोड़े से यह व्रत करना चाहिए।












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