Maa Katyayani Aarti: नवरात्रि के छठे दिन गाएं मां कात्यायनी की ये आरती, तभी मिलेगा पूजा का पूरा फल!

Maa Katyayani ki Aarti: शारदीय नवरात्रि का छठा दिन 28 सितंबर को है। नवरात्रि के इस दिन देवी कात्यायनी की पूजा और आरती का विशेष महत्व है। मां कात्यायनी को शक्ति, साहस और नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनका रूप अत्यंत सुंदर और तेजस्वी है, जो भक्तों के मन में श्रद्धा और भक्ति की भावना जगाता है।

ऐसा कहा जाता है कि मां कात्यायनी की आरती पढ़ने से न केवल मन की शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भी आता है। नवरात्रि के छठे दिन विशेष रूप से इस आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है। आज हम आपको बताएंगे मां कात्यायनी की आरती का सही तरीका और इससे होने वाले लाभ।

Maa Katyayani ki Aarti

मां कात्यायनी की आरती का महत्व

देवी कात्यायनी को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। उनका रूप अत्यंत सुंदर और तेजस्वी है। उन्हें नारी शक्ति का प्रतीक कहा जाता है। उनकी आरती पढ़ने या गाने से मन में श्रद्धा और आत्मविश्वास की भावना जागती है।
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आरती के दौरान क्या करें

मां कात्यायनी की आरती करते समय देवस्थान या घर के पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना चाहिए। दीपक जलाएं, पुष्प अर्पित करें और धूप-बत्ती से वातावरण को पवित्र बनाएं। भक्तजन आरती के दौरान मन से मां कात्यायनी से अपने कष्टों और इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

आरती के लाभ

माना जाता है कि मां कात्यायनी की आरती से मन की शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही, यह आरती भक्तों में साहस, संकल्प और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा भी देती है।

आरती पाठ का समय

भक्तजन इसे सुबह और शाम के समय कर सकते हैं।

मां कात्यायनी की आरती (Maa Katyayani ki Aarti)

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।जय जग माता जग की महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।वहावर दाती नाम पुकारा॥

कई नाम है कई धाम है।यह स्थान भी तो सुखधाम है॥

हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी।कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥

हर जगह उत्सव होते रहते।हर मन्दिर में भगत है कहते॥

कत्यानी रक्षक काया की।ग्रंथि काटे मोह माया की॥

झूठे मोह से छुडाने वाली।अपना नाम जपाने वाली॥

बृहस्पतिवार को पूजा करिए।ध्यान कात्यानी का धरिये॥

हर संकट को दूर करेगी।भंडारे भरपूर करेगी॥

जो भी माँ को भक्त पुकारे।कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

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Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी और धार्मिक जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई सामग्री का उद्देश्य किसी भी प्रकार की धार्मिक सलाह, व्यक्तिगत या वित्तीय निर्णय के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना नहीं है।

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