Lunar Eclipse 2021: अविवाहित लोगों के लिए अच्छा नहीं होता चंद्र ग्रहण, जानिए क्या है वजह?

नई दिल्ली, 19 नवंबर। कार्तिक पूर्णिमा के दिन साल 2021 का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि ये ग्रहण भारत में प्रभावी नहीं है क्योंकि ये जिस वक्त लगेगा उस वक्त भारत में दिन रहेगा लेकिन ये जिस वक्त खत्म होगा उस वक्त देश के पूर्वोत्तर राज्यों में सूर्यास्त होगा और तब उस वक्त ये आंशिक रेखा के रूप में नार्थ ईस्ट में नजर आएगा। ये सदी का सबसे लंबा आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है, जो कि 19 नवंबर 2021 शुक्रवार को भारतीय समय के अनुसार प्रात: 11.34 बजे प्रारंभ होगा और सायं 5.33 पर पूर्ण होगा। ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 59 मिनट रहेगी।

अविवाहित लोगों को चांद देखने से रोका जाता है

अविवाहित लोगों को चांद देखने से रोका जाता है

वैसे तो साइंस के हिसाब से चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है लेकिन धर्म में ग्रहण को लेकर कुछ बातें कहीं गई हैं, जिसके हिसाब से चंद्र ग्रहण हो या सू्र्य ग्रहण दोनों का होना अच्छा नहीं मानते हैं। इसलिए चंद्र ग्रहण के दीदार से अविवाहित लोगों को रोका जाता है।

अविवाहित लोगों की शादी में बाधा आती है

अविवाहित लोगों की शादी में बाधा आती है

ऐसा माना जाता है कि चंद्र ग्रहण के दिन चांद को देखने से अविवाहित लोगों की शादी में बाधा आती है। उनकी बनती-बनती बात बिगड़ जाती है क्योंकि पौराणिक कथाओं के मुताबिक चांद को श्राप मिला हुआ है, जिसकी वजह से चांद को सीधे तौर पर देखने पर देखने वाले व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में दिक्कतें आती हैं।

चांद को अपने रूप का घमंड हो गया था

चांद को अपने रूप का घमंड हो गया था

दरअसल ऐसी कहानी है कि चांद को अपने रूप का घमंड हो गया था और वो किसी का भी मजाक उड़ा देता था। एक बार उसने प्रभु श्री गणेश का भी मजाक उड़ाया था, जिस पर गणेश जी ने उसे गुस्से में श्राप दिया था कि जो कोई भी तुम्हें निहारेगा वो कलंक का भागीदार बनेगा। चांद को जब ये श्राप मिला तो उसकी पत्नियां उससे दूर हो गईं, हालांकि उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने प्रभु से माफी मांगी।

चांद की पूजा छलनी से होने लगी

चांद की पूजा छलनी से होने लगी

जिसके बाद गणेश जी ने कहा कि मेरा श्राप तो अब वापस नहीं आ सकता लेकिन जिस दिन तुम पूरे आकार में होगे यानि की पूर्णिमा वाले दिन लोग तुम्हारी पूजा करेंगे लेकिन इसके लिए उन्हें तुम्हारी परछाई की पूजा करनी होगी। जिसके बाद से ही चांद की पूजा छलनी से होने लगी और चांद की पत्नियां उनके पास आ गईं। उसका वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ था इस वजह से बड़े-बुजुर्ग अविवाहितों को चांद को निहारने से मना करते हैं।

वृषभ राशि और कृतिका नक्षत्र

आपको बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा को दिखाई देने वाला ग्रहण खंडग्रास चंद्रग्रहण है जो कि वृषभ राशि और कृतिका नक्षत्र में प्रारंभ होगा। यह पूर्ण रूप से पूर्वी एशिया, उत्तरी यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर में दिखाई देगा।

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