Kushotpatini Amavasya 2020: पितृ कार्य और संतान प्राप्ति के लिए करें व्रत

नई दिल्ली। भाद्रपद माह की अमावस्या को कुशोत्पाटिनी अमावस्या कहा जाता है। कुशोत्पाटिनी का अर्थ है कुशा को उखाड़ना या उसका संग्रहण करना। इस अमावस्या पर धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ आदि के लिए वर्ष भर तक चलने वाली कुशा का संग्रहण किया जाता है। यदि कुशोत्पाटिनी अमावस्या सोमवार के दिन आए तो इस दिन संग्रहित की गई कुशा का उपयोग 12 वर्ष तक किया जा सकता है। इस वर्ष कुशोत्पाटिनी अमावस्या 19 अगस्त 2020, बुधवार को आ रही है। कुशा का उपयोग हिंदू पूजा पद्धति में प्रमुखता से किया जाता है। न केवल पूजा बल्कि श्राद्ध आदि में भी कुशा का उपयोग होता है। इसलिए यह अमावस्या कुशा के संग्रहण का दिन होता है। इसके साथ ही भाद्रपद अमावस्या पितरों के निमित्त किए जाने वाले कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। इस दिन नई कुशा से पितरों को तर्पण करने का विधान भी है।

 पिथौरा अमावस्या भी कहते हैं

पिथौरा अमावस्या भी कहते हैं

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध कर्म, तर्पण, पिंडदान आदि के लिए विशेष माना जाता है। यह तिथि दान-पुण्य, कालसर्प दोष निवारण के लिए भी महत्वपूर्ण मानी गई है। भाद्रपद अमावस्या में परिवार की सुख-शांति और धन-संपदा की प्राप्ति के लिए भी अनेक उपाय किए जाते हैं। भाद्रपद अमावस्या को पिथौरा अमावस्या भी कहा जाता है, इसलिए इस दिन देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। कहा जाता है इस दिन माता पार्वती ने इंद्राणी को इस व्रत का महत्व बताया था। विवाहित स्त्रियों द्वारा संतान की प्राप्ति एवं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए देवी दुर्गा की पूजा की जाती है।

कुशा निकालने के नियम

कुशा निकालने के नियम

कुशा एक प्रकार की घास होती है। कुशोत्पाटिनी अमावस्या के दिन कुशा को निकालने के लिए कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है। शास्त्रों में दस प्रकार की कुशा का वर्णन दिया गया है।

कुशा: काशा यवा दूर्वा उशीराच्छ सकुंदका:।
गोधूमा ब्राह्मयो मौन्जा दश दर्भा: सबल्वजा:।।

मान्यता है कि घास के दस प्रकारों में जो भी घास सुगमता से एकत्रित की जा सकती हो इस दिन कर लेनी चाहिए। लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि कुशा को किसी औजार से ना काटा जाए, इसे केवल हाथ से ही एकत्रित करना चाहिए और उसकी पत्तियां अखंडित होना चाहिए। यानी पत्तियों का अग्रभाग टूटा हुआ नहीं होना चाहिए। कुशा एकत्रित करने के लिए सूर्योदय का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके लिए उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और दाहिने हाथ से एक बार में ही कुशा को निकालें। कुशा निकालते समय निम्न मंत्र का उच्चारण करें-

विरंचिना सहोत्पन्न् परमेष्ठिन्न्सिर्गज ।
नुद सर्वाणि पापानि दर्भ स्वस्तिकरो भव ।।

कुशा एकत्रित करने का समय

कुशा एकत्रित करने का समय

  • प्रात: 6.06 बजे से 7.42 बजे तक लाभ
  • प्रात: 7.42 बजे से 9.18 बजे तक अमृत

क्या करें कुशोत्पाटिनी अमावस्या के दिन

  • कुशोत्पाटिनी अमावस्या के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी, कुएं आदि में स्नान करें। कुआं या नदी उपलब्ध ना हो तो घर में ही पवित्र नदियों का जल पानी में डालकर स्नान करें।
  • इसके बाद उगते सूर्य को तांबे के कलश में तिल डालकर अर्घ्य दें।
  • इस अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी के किनारे पंडित के माध्यम से तर्पण, पिंडदान आदि कर्म करें और पितरों के निमित्त दान करें।
  • जन्मकुंडली में ग्रहण दोष है तो उसकी शांति की पूजा अमावस्या पर करवाना चाहिए।
  • इस दिन कालसर्प दोष की पूजा भी करवाई जा सकती है।
  • शनि दोष, शनि की साढ़ेसाती आदि की शांति के लिए अमावस्या पर विशेष पूजा करवाएं।
  • भाद्रपद अमावस्या के दिन सुबह के समय पीपल के पेड़ में मीठा कच्चा दूध अर्पित करने से धन और सुखों की प्राप्ति होती है।
  • इस अमावस्या के दिन शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसो के तेल के पांच दीपक लगाएं।
  • कुशोत्पाटिनी अमावस्या के दिन शिवमहिम्नस्तोत्र से शिवजी का पंचामृत अभिषेक करने से अभीष्ट की प्राप्ति होती है।

अमावस्या तिथि

अमावस्या तिथि प्रारंभ 18 अगस्त को प्रात: 10.39 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त 19 अगस्त को प्रात: 8.10 बजे तक

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