करवा चौथ: निर्जला रहने पर भी चांद की तरह दमकती हैं स्त्रियां
सुबह से बिना पानी पिए अपने पिया की लंबी उम्र की कामना के लिए करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिला इतनी खूबसूरत कैसे लगती है, क्या ये व्रत का प्रभाव है या फिर उसका पति के लिए प्रेम है
लखनऊ। आखिर कुछ तो है करवा चौथ के व्रत में जिसमें निर्जला रहने के बाद भी न तो महिलाओं के उत्साह में कोई कमी दिखलाई देती है न ही उनके चेहरे की रौनक गायब होती है और तो और उनका चेहरा चांद की तरह चमकता दिखता है।
शायद इसके पीछे कारण है वो प्यार,सर्मपण और त्याग, जिसके दम पर महिलायें उपवास में एकदम तरो -ताजा दिखलाई देती हैं। करवा चौथ के पर्व को वैसे तो देश के पंजाब,उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश का मुख्य त्यौहार मनाया जाता है परन्तु पिछले कुछ बर्षों से सारे देश में महिलायें अति उत्साह के साथ इसे मनाती हैं।
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाये जाने वाले उक्त त्यौहार में सुहागिन महिलायें अपने पति के जीवन के रक्षार्थ, दीर्घायु एवं सुखी जीवन की कामना करते हुये संध्या के समय गौधूली बेला में अर्थात् चन्द्रोदय के पूर्व पूर्ण विधिविधान के साथ प्रथम पू'य भगवान श्री गणेश एवं गौरी,शिव पार्वती तथा चौथ की मुख्य देवी अम्बिका का पूजनार्चन करती हैं।
पौराणिक कथाओं मे भगवान शिव एवं पार्वती को एक आर्दश युगल बतलाया गया है। करवा चौथ में प्रयोग होने वाले प्रमुख पात्र को करवा कहते हैं। जो प्राय:मिट्टी के कलश नुमा एक लघु घट के समान होता है इसमें सिर्फ एक लम्बी नलकी लगी होती है । कुछ क्षेत्रों में तांबे,पीतल एवं चांदी के घट का प्रयोग भी महिलायें करती हैं परन्तु इनकी संख्या कम है।
चन्द्रमा भगवान शिव के मस्तक पर शोभित रहता है इसी कारण उसे अर्क देने का विधान बतलाया गया है। दिन भर व्रत के साथ उक्त पूजन सम्पन्न करने के पश्चात् महिलाएं चांद का पूजन कर उसे करवा से अर्क देते हुये उसे चलनी से निहारने के साथ-साथ पति को निहारती है।
पूजन के साथ वह भगवान भालचंद्र से सुखमय जीवन,पति-प्रेम पारिवारिक सुख समृद्धि एवं पति के उज्जवल भविष्य के साथ लंबी उम्र के लिये प्रार्थना करती है। फिर पति के हाथ से जल का सेवन कर अपना व्रत तोडती है।













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