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Kartik Snan Ke Niyam: जानिए क्या है कार्तिक स्नान के नियम और महत्व?

आज से भगवान विष्णु के प्रिय महीने कार्तिक की शुरुआत हुई है।

Kartik Snan ki Vidhi aur Mahatava: आज से भगवान विष्णु के प्रिय महीने कार्तिक की शुरुआत हुई है। इस माह में लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, कहते हैं कि ऐसा करने से इंसान के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसके सारे पाप भी धुल जाते हैं और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा इंसान पर बरसती है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस महीने में जप, तप, दान का भी काफी महत्व है। कहते हैं कि कार्तिक माह में स्नान के भी नियम है, चलिए जानते हैं उसके बारे में विस्तार से।

पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है

पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है

सतयुग के बाद अगर कोई माह का नाम आता है तो वो है कार्तिक मास। माना जाता है कि इस माह की पूर्णिमा वाले दिन तो भगवान भी धरती पर उतर आते हैं। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है इसलिए इस दौरान काशी, प्रयाग राज जैसे तीर्थ स्थलों पर जमकर भक्तों की भीड़ देखी जाती है। लेकिन अगर आप किसी कारणवश पवित्र नदियों तक नहीं पहुंच पाते हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप अपने नहाने वाले जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिला सकते हैं।

सूर्योदय से पहले किया गया स्नान

सूर्योदय से पहले किया गया स्नान

घर में स्नान करने के बाद आप तुलसी के पौधे ओर आप अपने घर के मंदिर में घी-तेल का दीपक सुबह-शाम जला सकते हैं और कार्तिक मास की कथा सुन सकते हैं। कार्तिक माह में प्रतिदिन सूर्योदय से पहले किया गया स्नान एक हजार गंगा स्नान के बराबर माना गया है। कार्तिक मास में ही तुलसी माता और शालिग्राम का विवाह किया जाता है औऱ कहते हैं कि सुबह-शाम तुलसी के पास दीपक जलाने से मां लक्ष्मी और प्रभु विष्णु की कृपा इंसान के ऊपर बरसती है और उसके घर में धन-वैभव की प्राप्ति होती है।

भक्तों का सीधे साक्षात्कार श्रीहरि से होता है

भक्तों का सीधे साक्षात्कार श्रीहरि से होता है

कार्तिक माह में अन्न, धन एव वस्त्र दान का भी बहुत महत्व है। ये महीना संयमित होकर प्रभु में ध्यान लगाने का होता है। इससे इंसान को हर तरह का सुख और शांति मिलती है। भक्तों का सीधे साक्षात्कार श्रीहरि से होता है इसलिए लोग इस माह का बेसब्री से इंतजार भी करते हैं।

हाथ में कुशा लेकर स्नान करें जि

हाथ में कुशा लेकर स्नान करें जि

स्नान के बारे में महर्षि अंगिरा ने कहा है कि अगर आप स्नान करने गए हैं तो हाथ में कुशा लेकर स्नान करें जिससे आपको कर्मफल की प्राप्ति हो इसी प्रकार आप अगर दान कर रहे हों तो आप अपने हाथ से पहले जल दान करें और फिर किसी और चीज का दान करें, इससे आपके सारे पापों का अंत तो होगा ही साथ ही आपकी हर इच्छा भी पूरी होगी।

स्नान करते वक्त इन मंत्रों का भी जाप करें

स्नान करते वक्त इन मंत्रों का भी जाप करें

  • ॐ नम: शिवाय
  • ॐ हौं जूं सः, ॐ भूर्भुवः स्वः,
  • ॐ त्र्यम्बेकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धूनान् मृत्योवर्मुक्षीय मामृतात्
  • ॐ स्वः भुवः भूः, ॐ सः जूं हौं ॐ.
  • ॐ विष्णवे नम:
  • ॐ हूं विष्णवे नम:
  • . ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
  • दन्ताभये चक्र दरो दधानं,
  • कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
  • धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया
  • लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
  • ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
  • ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।

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