नहीं रहे कन्हैया लाल नंदन

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार शनिवार तड़के तीन बजे के करीब उन्होंने अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से डायलिसिस पर थे। उनका अंतिम संस्कार रविवार को लोदी कॉलोनी के श्मशान घाट पर किया जाएगा। नंनद का जन्म 1 जुलाई, 1933 में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के परसदेपुर गांव में हुआ था।
उनके मित्रों के अनुसार वो स्वभाव से बेहद सरल और उच्च व्यक्तित्व के धनी थे। वह बतौर संपादक खोजी पत्रकारिता और नए प्रयोगों के पक्षधर थे। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत मशहूर पत्रिका 'धर्मयुग' से की। पत्रकारिता में कदम रखने से पहले अध्यापन से जुड़े थे।
नंदन ने पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम बनाया। पराग, सारिका और दिनमान जैसी पत्रिकाओं में बतौर संपादक अपनी छाप छोड़ने वाले नंदन ने लगभग तीन दर्जन किताबें भी लिखीं।
नंनद ने नवभारत टाईम्स के फीचर एडीटर पद पर भी काम किया। नंनद को पद्मश्री और भारतेन्दु पुरस्कार के अलावा नेहरू फेलोशिप से भी नवाजा गया। नंनद के लिखे गीत और कविताएं भी मशहूर हैं।












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