Krishna janmashtami: कन्हैया के जन्म के समय द्वापर युग में बने थे जो योग, वैसे ही आए इस साल
मथुरा, ब्रजभूमि 30 अगस्त: आज भगवान विष्णु के 22वें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। श्रीकृष्ण द्वापर युग में मथुरा में राक्षसराज कंस की जेल में जन्मे थे। पुराणों के अनुसार, जिस रात कृष्ण मां देवकी के गर्भ से जन्मे, उस समय भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, वृषभ राशि का चंद्र और दिवस बुधवार था। हजारों बरसों के उपरांत, एक बार फिर इस साल उस समय के जैसे तीन योग बने हैं।
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कृष्ण जन्म के समय के 3 दुर्लभ योग इस बार भी
विद्वानों का कहना है कि, धरती पर कृष्ण का अवतार हुए 5248 साल हो गए हैं। उनके जन्मदिवस पर, आज यानी कि 30 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहे हैं। ये सभी योग पूजा-पाठ के साथ ही किसी बड़े काम की शुरुआत के लिए बहुत अच्छे माने गए हैं। इन योगों में शुरू किए गए काम जल्दी सफल हो सकते हैं। मथुरा में श्रीकृष्ण के श्रीमद्भागवत पुराण का ढाई दशक से सत्संग-कीर्तन करा रहे आचार्य भगवानसिंह दास ने बताया कि, द्वापर युग में जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र था, साथ ही उस दिन चंद्र वृष राशि में स्थित था। ये संयोग इस साल भी बने हैं। यह दुर्लभ संयोग ही है कि, भादौं मास में इस बार, कृष्ण पक्ष की अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि का चंद्र रहेगा। उन्होंने कहा कि, इस बार, एक और खास बात यह है कि स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय को मानने वाले लोग एक ही दिन जन्माष्टमी मना रहे हैं।

विद्वानों का मत- 5248 बरस पहले हुए अवतरित
भगवताचार्य ने कहा, "आज जन्माष्टमी की रात रोहिणी नक्षत्र और चंद्र वृषभ राशि में उच्च रहेगा।" उन्होंने कहा कि, इस पर्व पर बाल गोपाल की विशेष पूजा करने का योग भी है। कान्हा के जन्मदिवस पर, हमें केसर मिश्रित दूध को दक्षिणावर्ती शंख में भरकर अभिषेक करना चाहिए। माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाना चाहिए। धूप-दीप जलाकर आरती करनी चाहिए। साथ ही, ध्यान रखें बाल गोपाल के साथ गौमाता की छोटी सी मूर्ति जरूर रखनी चाहिए। आप किसी गौशाला में अन्न व धन दान भी कर सकते हैं।

जन्माष्टमी पर ऐसे करें कृष्ण की पूजा
वृंदावन में देशी-विदेशी श्रोताओं को कृष्णकथा सुनाने वाले कथावाचक श्रीचंद ने बताया कि, कन्हैया की पूजा में तुलसी व धूप-दीप का बड़ा महत्व होता है। गाय हो या उसकी मूर्ति हो, कृष्ण की तस्वीर के सामने धूप-दीप जलाकर उनकी आरती करें। पूजा में हुई जानी-अनजानी भूल के लिए क्षमा याचना करें। पूजा के बाद घर के सदस्यों को प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। उन्होंने कहा कि, मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे कृष्ण की नगरियों का भ्रमण करें, यहां रज-रज में कृष्ण का अहसास करेंगे। मथुरा, वृंदावन, गोकुल, वृंदावन, नंदगांव, संकेत, गोवर्धन, दाउूजी समेत कई तीर्थस्थल हैं..जहां दूर-दूर के भक्त आए हुए हैं।
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