Janmashtami 2025: जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के पांच मंत्र कर देंगे मालामाल
Janmashtami 2025: श्रीहरि विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद कृष्ण अष्टमी आज मनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण संपूर्ण 64 कलाओं से युक्त हैं और विष्णु के पूर्णावतार कहे जाते हैं। उनकी आराधना, भक्ति, पूजा, दर्शन से ऐसी कोई वस्तु नहीं जो मनुष्य को प्राप्त न हो जाए। जिसे धन-संपदा चाहिए उसे श्रीकृष्ण वही प्रदान करते हैं, जिसे मोक्ष चाहिए उसे श्रीकृष्ण मोक्ष प्रदान करते हैं।
जन्माष्टमी एक ऐसा दिन है जब से भक्तों पर अपनी संपूर्ण निधि लुटाने को आतुर रहते हैं। आइए जानते हैं ऐसे पांच मंत्र जो श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के अचूक साधन हैं।

कृं कृष्णाय नम: (Janmashtami 2025)
भगवान श्रीकृष्ण का यह मंत्र सर्वसिद्धिदायक कहा गया है। इस मंत्र को जन्माष्टमी की रात्रि में सिद्ध किया जाता है। इस मंत्र को जपने के लिए अपने घर के एकांत स्थान में या पूजा स्थान में लाल आसन बिछाकर पूर्वाभिमुख होकर बैठें। अपने सामने श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र रखकर पूजन करें। लाल पुष्प अर्पित करें। सफेद स्फटिक की माला से इस मंत्र की 11 माला जाप करें। मिश्री का भोग लगाएं। जिस कामना से यह मंत्र जपा जाएगा वह पूरी होगी। धन, प्रेम, आकर्षण सबकुछ प्राप्त हाेगा।
ऊं क्लीं कृष्णाय नम:
यह मंत्र समस्त प्रकार के वैभव, प्रेम, आकर्षण और वशीकरण की शक्ति प्रदान करता है। इस मंत्र को जन्माष्टमी की रात्रि में जपा जाता है। इसके लिए सफेद आसन बिछाकर उस पर पिंक स्फटिक की माला से 108 माला मंत्र जप कर लें। फिर जब आपको किसी को वशीभूत करना हो तब 11 बार मंत्र बोलकर उसके सामने जाएं आपके वश में सामने वाला व्यक्ति होगा।
ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाया कुण्ठमेधसे। सर्वव्याधि विनाशाय प्रभो माममृतं कृधि:।।
इस मंत्र का जाप जन्माष्टमी की रात्रि में या दिन में भी किया जा सकता है। इस मंत्र में समस्त प्रकार के रोग दूर करने की शक्ति है। इसके लिए श्रीकृष्ण की काले रंग की मूर्ति के सामने काला आसन बिछाकर बैठें और काले हकीक की माला से मंत्र की सात माला जाप करें। यह प्रयोग आपके कठिन से कठिन प्रकार के रोग दूर कर देता है।
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात:
यह श्रीकृष्ण गायत्री मंत्र है। इस मंत्र को शास्त्रों में चमत्कारी बताया गया है। यह मंत्र एकांत में कम से कम एक माला जपना चाहिए। इससे आर्थिक कष्ट दूर हो जाते हैं। मनुष्य के सत्कर्मों का उदय होता है और उसके पास समस्त वैभव स्वत: ही आने लगते हैं।
ऊं नमो भगवते वासुदेवाय (Janmashtami 2025)
यह सर्वविदित मंत्र है और अधिकांश लोग अपने दैनिक जीवन में इस मंत्र का जाप करते भी हैं। इस मंत्र के प्रभाव से ऐसी कोई वस्तु नहीं जो प्राप्त न हो पाए। इस मंत्र को जन्माष्टमी के दिन एक हजार बार जप लें। फिर देखिए जीवन में कैसे चमत्कार जैसा होता है।












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