जानिए काम, वासना और रूप के देव 'कामदेव' के बारे में

बैंगलुरू। काम, वासना और रूप के देव 'कामदेव' के बारे में लोगों को ज्यादा कुछ मालूम नहीं है लेकिन हिंदू संस्कृति और आध्यात्म में एक बड़ा स्थान रखने वाले इस देव के बारे में हर किसी को जानकारी होनी चाहिए।

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आईये डालते हैं एक नजर जानिए काम, वासना और रूप के देव 'कामदेव' के पूर्व व्यक्तित्व पर..

  • 'कामदेव' को हिंदू धर्मग्रंथों को प्रेम का देवता माना गया है।
  • पाश्चात्य संस्कृति के लोग भले ही प्रेम को वैलेनटाइन दिवस के रूप में मनाते हैं लेकिन बरसों से भारत में 'कामदेव' की पूजा होती आयी है।
  • 'कामदेव' अतयन्त सुंदर और मोहक माने जाते हैं।
  • 'कामदेव' की पत्नी का नाम रति है।

इस मोहक देव के बारे में और बातें करेंगे नीचे की स्लाइडों में...इसलिए प्लीज क्लिक कीजिये..

कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न का अवतार

कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न का अवतार

'कामदेव' को हिंदू देवी श्री के पुत्र और कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न का अवतार माना गया है।

'कामदेव' का अस्त्र धनुष

'कामदेव' का अस्त्र धनुष

'कामदेव' का अस्त्र धनुष है क्योंकि धनुष ही एक ऐसा अस्त्र है जिसमें स्थिरता और चंचलता दोनों ही होती है और रूप में भी यही गुण होता है।

मित्र बसंत

मित्र बसंत

'कामदेव' के मित्र बसंत को माना गया है इसलिए 'कामदेव' का धनुष हमेशा पीला माना गया है।

सबसे महत्वपूर्ण शस्त्र

सबसे महत्वपूर्ण शस्त्र

तीर 'कामदेव' का सबसे महत्वपूर्ण शस्त्र है।

तीन दिशाओं में तीन कोने

तीन दिशाओं में तीन कोने

इस तीर के तीन दिशाओं में तीन कोने होते हैं, जो क्रमश: तीन लोकों के प्रतीक माने गए हैं।

तीर के तीन मायने

तीर के तीन मायने

पहला कोना ब्रह्म के आधीन है जो निर्माण का प्रतीक है। यह सृष्टि के निर्माण में सहायक होता है। दूसरा कोना कर्म का प्रतीक है जो कि मनुष्य को कर्म करने की प्रेरणा देता है। कामदेव के तीर का तीसरा कोना महेश (शिव) के आधीन होता है, जो मकार या मोक्ष का प्रतीक है।

विपरीत लिंग

विपरीत लिंग

'कामदेव' के धनुष का लक्ष्य विपरीत लिंगी होता है। इसी विपरीत लिंगी आकर्षण से बंधकर पूरी सृष्टि संचालित होती है।

पुरूष-स्त्री

पुरूष-स्त्री

कामदेव का एक लक्ष्य खुद काम हैं, जिन्हें पुरुष माना गया है, जबकि दूसरा रति हैं, जो स्त्री रूप में जानी जाती हैं।

'कामदेव' का वाहन हाथी

'कामदेव' का वाहन हाथी

हाथी को 'कामदेव' का वाहन माना गया है। वैसे कुछ शास्त्रों में कामदेव को तोते पर बैठे हुए भी बताया गया है लेकिन शास्त्रों के पुजारी इसे सही नहीं मानते।

'कामदेव' के कितने नाम

'कामदेव' के कितने नाम

'कामदेव' को ही लोग रागवृंत, अनंग, कंदर्प, मनमथ, मनसिजा, मदन, रतिकांत के नामों से परिभाषित करते हैं।

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