लक्ष्मी-गणेश पर पड़ी महंगाई की मार

अनेक साज सज्जाओ से युक्त देवी देवताओ की मूर्तियो का जमावडा मार्केट में देखने का मिलता है। इस दिन हर आकार की मूर्ति मार्केट में उपलब्ध हो जाती है। लेकिन इस बढती महंगाई ने तो पूजा अर्चना मे भी अवरोध पैदा कर रही है। पिछले वर्षों की तुलना में इस साल लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की कीमतें आसमान छू रहे हैं। हमारे त्योहारों पर सबसे बडा ग्रहण महंगाई ने लगा दिया है। महंगाई का साक्षात उदाहरण आसमान छूते मूर्तियों के दाम है, जिस मूर्ति का मूल्य पिछले साल तक पचास रुपये था इस साल उसी मूर्ति की कीमत सौ रुपये लगाई गयी है। इस बढती महंगाई के कारण लोगो के उत्साह मे कमी जरूर देखी जाती है। जिस प्रदेश में मूर्तियों का निर्माण नहीं होता है वंहा के मूल्य तो आसमान छू ही रहे है लेकिन जिस राज्य में मूर्ति का निमार्ण हो रहा वहां भी दाम काफी ज्यादा हैं।
बिहार देश का मूर्ति निर्माण का बडा केन्द्र है, लेकिन यहां आई बाढ़ ने सब मूर्तियों के व्यापार को फीका कर दिया। वही आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य को लेकर चल रहे बवाल के कारण दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल खुद आंध्रा में उत्तर प्रदेश व बिहार में निर्मित मूर्तियां पहुंच नहीं पायी हैं। मूर्तियो की सप्लाई कम होने के कारण बैंगलोर समेत सभी दक्षिण भारतीय शहरों में मूर्तियो की कीमत काफी ज्यादा है। छह इंच तक के लक्ष्मी गणेश की कीमत 150 रुपए लगायी गई है, वहीं एक फुट तक की मूर्तियों की कीमत 500 से 5000 रुपए तक है। इसके अलावा बड़ी मूर्तियों की कीमत दस से 50 हजार रुपए तक है।
खैर पूजा तो लोग करेंगे ही, जाहिर है इस महंगाई के चलते मूर्तियों पर अगर ज्यादा खर्च हुआ, तो अन्य चीजों में कटौती जरूर संभव है। यानी घरों में इस बार मिठाई व पटाखों में कमी दिखाई दे सकती है।












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