MP: दुनिया के सबसे प्राचीन नगर 'ऐरण' में भगवान "श्रीकृष्ण की लीलाओं" के दर्शन
सागर, 19 अगस्त। धरती पर दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में शुमार ऐतिहासिक नगरी ऐरण में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का पत्थर की शिलाओं और प्रतिमाओं में अदभुत, अनुपम और अलौकिक चित्रण देखने को मिलता है। करीब 1600 साल पहले इस समृद्रधशाली गुप्तकालीन नगरी में भगवान कृष्ण की लीलाओं का शिल्पकारों ने पाषाण पर उकेरा था। यहां कुल 26 शिला पट्टिकाओं पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर कंस वध तक का चित्रण किया गया है। इतिहासकार बताते हैं कि प्रतिमाओं के रुप में कृष्ण लीलाओं का इतना प्राचीन प्रतिमाओं में उल्लेख देश में किसी अन्य स्थान पर नहीं मिलता है।

सागर जिले के ऐरण नगर में भगवान श्रीकृष्ण बाल लीलाओं पर मूर्तिकला
दुनिया में मानव सभ्यता के सबसे पुराने और अति प्राचीन नगरों में शुमार सागर जिले के ऐरण नगर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, बाल लीलाओं, रासलीलाओं, मथुरा जाने और कंस वध तक का प्राचीन पत्थरों पर मूर्तिकला के रुप में अलौकिक, अनूठा चित्रण किया गया है। कुल 26 प्रतिमाओं में भगवान के चतुर्भुजी स्वरुप की आराधना, कृष्णजन्म से लेकर कंसवध तक की लीलाओं के यहां मूर्ति स्वरुप में दर्शन मिलते हैं।

भगवान विष्णु की माता देवकी-वसुदेव द्वारा आराधना
एरण में 1600 साल पहले गुप्तकाल में भगवान की लीलाओं से जुड़ी प्रतिमाओं को काले बलुआ पत्थर पर बेहतरीन तरीके से सजाया गया था। इसमें सबसे पहली प्रतिमा में भगवान विष्णु के चतुर्भुजी स्वरुप के दर्शन होते हैं। इसमें भगवान कृष्ण के माता-पिता देवकी और वसुदेव द्वारा उनकी आराधना व देवी लक्ष्मी द्वारा भगवान के पैर दबाते हुए शिल्पांकित किया गया हैं।

कंस के कारागार में भगवान के जन्म की प्रतिमाएं
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पहले देवाताओं द्वारा दो अवश्वमुख वाले अश्विनीकुमारों एवं सेविकाओं को कारागृह में भेजने, कारागृह में ढाल तलवार लिए द्वाररक्षक और राजा कंस की प्रतिमा मौजूद हैं। इसमें माता देवकी से भगवान कृष्ण के जन्म के बाद भगवान कृष्ण को गोद में लिए हुए, पिता वासुदेव के साथ भगवान के बाल स्वरुप का अंकन किया गया है। इसके साथ ही अगले चित्र में माता देवकी भगवान को स्तनपान कराते हुए। इसके अलावा कारागार में देवता फूल माला लिए अंकित हैं।

भगवान कृष्ण को पिता वासुदेव द्वारा गोकुल पहुंचाने का भी शिल्पांकन
एरण में स्थापित कृष्ण लीलाओं की प्रतिमाओं में पांचवे स्थान पर अंकित प्रतिमा में भगवान के जन्म के बाद आकाश में स्तुति करते देवता, उनके पिता वासुदेव कारागृह से अपनी गोद में लेते हुए एवं कारागृह के द्वाररक्षक ढाल तलवार लिए हुए निद्रमग्न अवस्था में अंकित हैं। इसी शिला पर आगे वासुदेव द्वारा यशोदा से नवजात कन्या लेते हुए एवं बालक कृष्ण को सौंपते हुए शिल्पांकन मौजूद है।

कंस द्वारा देवकी के छह शिशुओं की हत्या को भी अंकित किया गया
एरण में छठवें नंबर की प्रतिमा में देवकी और वासुदेव ककी छह नवजात शिशुओं को मारते हुए कंस का अंकन किया गया है। नवजात कन्या द्वारा आकाश में जाकर आकाशवाणी करते हुए कि कंस को मारने वाला पैदा हो चुका है। सूर्य के समीप देवी का अंकन किया गया है। कृष्ण लीला की इतनी जीवंत कहानी और प्रतिमाओं की मौजूदगी देश में अन्य किसी स्थान पर नहीं है।

रोहणी के गर्भ में शेषनाग के स्थापित करने का भी उल्लेख
एरण में कृष्ण लीलाओं के साथ ही उनके बडे़ भाई बलराम के माता रोहणी के गर्भ में जाने का भी अंकन किया गया है। इसमें रोहणी के गर्म में शेषनाग के अवतार बलराम का देवकी के गर्भ से अश्विनी कुमारों के द्वारा माता रोहणी के गर्भ में गर्भ प्रत्यारोपण का अंकन शेषनाग के फणों के साथ शेष रुपी बलराम के मुख का अंकन किया गया है।

वंशीधर की लीलाआएं, कालिया मर्दन, माखन चोरी की लीलाएं प्रमुखता से प्रदर्शित
स्तंभ स्थल पर भगवान कृष्ण की पाषाण प्रतिमाओं में भगवान श्रीकृष्ण की वंशीधर के रुप में बाल लीलाएं, बलराम व सखाओं के साथ गाय चराने का संुंदर अंकन है। कदंब पेड़ पर चढ़ते हुए, कदंब से यमुना में कूदतें हुए। कालियानाग के फन को पकडे़ हुए, मारते हुए, भगवान के सामने हाथ जोडे़ कालियानाग की पत्नियां तथा यमुना में कमल पुष्पाों का अंकन, बाल कृष्ण एवं बलराम की माखन चोरी की लीलाएं, माता यशोदा से शिकायत करते हुए नंदगाव की गोपियां, गधासुर, धेनुकासुर आदि का संहाार सहित अन्य लीलाओं का काली शिलाओं पर चित्रण मिलता है।

मथुरा जाते समय गोपियों से प्रेमावर्तालाप एवं गोपियों से मनुहार भी मौजूद
एरण में गुप्तकालीन प्रतमाओं में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और जीवन दर्शन से जुड़ी अलग-अलग शिलाओं पर मौजूद कुल 26 पाषाण प्रतिमाएं मौजूद हैं। इनमें मथुरा जाते समय कृष्ण का गोपियों से वार्तालाप, उनकी मनुहार, मथुरा में भगवान को स्वागत, कुब्जा का उपचार, कंस से वार्तालाप, कंस वध सहित अन्य लीलाओं की ऐतिहासिक और अनोखी व दिव्य प्रतिमाएं यहां मौजूद हैं। ऐरण में हिंदू धर्म, कला, अध्यात्म और संस्कृति का अद्रभुत चित्रण मौजूद हैं।

विष्णु मंदिर, गरुण स्तंभ और दशावतार की भव्य प्रतिमाएं
ऐरण में कृष्णलीलाओं की जीवंत झांकी वाली प्रतिमाओं के अलावा दुनिया का यह सबसे पुराना और 4200 साल से भी अधिक समय मानव सभ्यता, संस्कृति और धरोहरों को सजोय यह शहर भगवान विष्णु के दशावतार, विष्णु मंदिर, गरुण स्तंभ, सती स्तंभ के लिए भी पहचाना जाता है। यहां 50 फीट ऊंचा गरुण स्तंभ, दुनिया की सबसे बड़ी बाराह प्रतिमा, भगवान विष्णु का मंदिर आज भी संरक्षित है।












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