Holi 2026 Lucky Rashiya: 'रूठे दिल मिल जाएंगे', इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत, लव लाइफ होगी सुंदर
Holi 2026 Lucky Rashiya: रंगों का त्योहार होली इस साल कई राशियों के लिए नई खुशियां, तरक्की और सकारात्मक बदलाव लेकर आया है, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की स्थिति और चंद्रमा का प्रभाव कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी संकेत दे रहा है कहते हैं ना होली के दिन दिल मिल जाते हैं तो आज भी कुछ राशियों के साथ ऐसा ही होने वाला है।
काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक मेष, तुला, सिंह और मीन राशियों के लिए आज का त्योहार बहुत सारी अच्छी बातें लेकर आया है, इन सभी को करियर और लव लाइफ में सफलता मिलेगी और धन की प्राप्ति होगी।

इन चार राशियों को मिलेगा सम्मान और प्यार (Holi 2026 Lucky Rashiya)
- मेष राशि (Aries): होली का समय मेष राशि वालों के लिए ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा, इनके रुके हुए कार्य पूरे होंगे, नौकरी और व्यवसाय में नई शुरुआत के योग हैं तो वहीं आर्थिक लाभ और सम्मान में वृद्धि होगी। लव लाइफ सुंदर रहेगी।
- वृषभ राशि (Taurus): वृषभ राशि वालों के लिए यह होली धन और पारिवारिक सुख लेकर आएगी। निवेश से लाभ के संकेत हैं तो दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी। धन में वृद्धि होगी। रूठा प्यार लौट आएगा।
- सिंह राशि (Leo): सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में उन्नति का है। उनके प्रमोशन के आसार हैं या उन्हें नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पुराने विवाद खत्म होंगे और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। सच्चा प्यार नसीब होगा।
- तुला राशि (Libra): तुला राशि वालों को आर्थिक लाभ और नए अवसर मिल सकते हैं। प्रेम संबंध मजबूत होंगे, भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और पार्टनरशिप में फायदा होगा।
हालांकि होली सभी राशियों के लिए शुभ है और सभी को कुछ ना कुछ देकर जाएगी, होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और खुशियों का प्रतीक है। इस वर्ष कुछ राशियों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकती है। सही दिशा में प्रयास और सकारात्मक सोच के साथ हर राशि अपनी किस्मत चमका सकती है।
Holi 2026 : आज जरूर करें ये काम
होली के दिन राधा-कृष्ण की पूजा जरूर करनी चाहिए, जो कोई ऐसा करता है उसकी लव लाइफ हमेशा अच्छी रहती है और घर का आंगन कभी भी सूना नहीं होता है।
दोहा ॥
- श्री राधे वुषभानुजा,
- भक्तनि प्राणाधार ।
- वृन्दाविपिन विहारिणी,
- प्रानावौ बारम्बार ॥
- जैसो तैसो रावरौ,
- कृष्ण प्रिया सुखधाम ।
- चरण शरण निज दीजिये,
- सुन्दर सुखद ललाम ॥
- ॥ चौपाई ॥
- जय वृषभान कुँवरी श्री श्यामा ।
- कीरति नंदिनी शोभा धामा ॥
- नित्य विहारिनि श्याम अधारा ।
- अमित मोद मंगल दातारा ॥
- रास विलासिनि रस विस्तारिनि ।
- सहचरि सुभग यूथ मन भावनि ॥
- नित्य किशोरी राधा गोरी ।
- श्याम प्राणधन अति जिय भोरी ॥
- करुणा सागर हिय उमंगिनी ।
- ललितादिक सखियन की संगिनी ॥
- दिनकर कन्या कूल विहारिनि ।
- कृष्ण प्राण प्रिय हिय हुलसावनि ॥
- नित्य श्याम तुमरौ गुण गावैं ।
- राधा राधा कहि हरषावैं ॥
- मुरली में नित नाम उचारें ।
- तुव कारण लीला वपु धारें ॥
- प्रेम स्वरूपिणि अति सुकुमारी ।
- श्याम प्रिया वृषभानु दुलारी ॥
- नवल किशोरी अति छवि धामा ।
- द्युति लघु लगै कोटि रति कामा ॥१०
- गौरांगी शशि निंदक बदना ।
- सुभग चपल अनियारे नयना ॥
- जावक युत युग पंकज चरना ।
- नूपुर धुनि प्रीतम मन हरना ॥
- संतत सहचरि सेवा करहीं ।
- महा मोद मंगल मन भरहीं ॥
- रसिकन जीवन प्राण अधारा ।
- राधा नाम सकल सुख सारा ॥
- अगम अगोचर नित्य स्वरूपा ।
- ध्यान धरत निशिदिन ब्रज भूपा ॥
- उपजेउ जासु अंश गुण खानी ।
- कोटिन उमा रमा ब्रह्मानी ॥
- नित्य धाम गोलोक विहारिणि ।
- जन रक्षक दुख दोष नसावनि ॥
- शिव अज मुनि सनकादिक नारद ।
- पार न पाँइ शेष अरु शारद ॥
- राधा शुभ गुण रूप उजारी ।
- निरखि प्रसन्न होत बनवारी ॥
- ब्रज जीवन धन राधा रानी ।
- महिमा अमित न जाय बखानी ॥२०
- प्रीतम संग देइ गलबाँही ।
- बिहरत नित वृन्दावन माँही ॥
- राधा कृष्ण कृष्ण कहैं राधा ।
- एक रूप दोउ प्रीति अगाधा ॥
- श्री राधा मोहन मन हरनी ।
- जन सुख दायक प्रफुलित बदनी ॥
- कोटिक रूप धरें नंद नंदा ।
- दर्शन करन हित गोकुल चंदा ॥
- रास केलि करि तुम्हें रिझावें ।
- मान करौ जब अति दुःख पावें ॥
- प्रफुलित होत दर्श जब पावें ।
- विविध भांति नित विनय सुनावें ॥
- वृन्दारण्य विहारिणि श्यामा ।
- नाम लेत पूरण सब कामा ॥
- कोटिन यज्ञ तपस्या करहु ।
- विविध नेम व्रत हिय में धरहु ॥
- तऊ न श्याम भक्तहिं अपनावें ।
- जब लगि राधा नाम न गावें ॥
- वृन्दाविपिन स्वामिनी राधा ।
- लीला वपु तब अमित अगाधा ॥३०
- स्वयं कृष्ण पावैं नहिं पारा ।
- और तुम्हें को जानन हारा ॥
- श्री राधा रस प्रीति अभेदा ।
- सादर गान करत नित वेदा ॥
- राधा त्यागि कृष्ण को भजिहैं ।
- ते सपनेहुँ जग जलधि न तरि हैं ॥
- कीरति कुँवरि लाड़िली राधा ।
- सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा ॥
- नाम अमंगल मूल नसावन ।
- त्रिविध ताप हर हरि मनभावन ॥
- राधा नाम लेइ जो कोई ।
- सहजहि दामोदर बस होई ॥
- राधा नाम परम सुखदाई ।
- भजतहिं कृपा करहिं यदुराई ॥
- यशुमति नन्दन पीछे फिरिहैं ।
- जो कोऊ राधा नाम सुमिरिहैं ॥
- रास विहारिणि श्यामा प्यारी ।
- करहु कृपा बरसाने वारी ॥
- वृन्दावन है शरण तिहारी ।
- जय जय जय वृषभानु दुलारी ॥४०
- ॥ दोहा ॥
- श्री राधा सर्वेश्वरी,
- रसिकेश्वर धनश्याम ।
- करहुँ निरंतर बास मैं,
- श्री वृन्दावन धाम ॥
- ॥ इति श्री राधा चालीसा ॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बातें करें। हमारा मकसद किसी भी तरह का अंधविश्वास फैलाना नहीं है।












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