हिंदी..अपनों ने ही बेघर किया
बेंगलुरू। आज हिंदी दिवस है, देश की राष्ट्रभाषा हिंदी है लेकिन फिर भी आज वो भाषा के मानचित्र के हाशिये पर खड़ी है। ना जाने इसके पीछे कारण क्या है? शायद प्रगतिशील समाज के चलते आज हिंदी भाषियों की हालत काफी पतली है। जो बच्चे हिंदी मीडियम स्कूलों में पढ़ते हैं उन्हें प्रतियोगिताओं में भाषा के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जो उस्ताद होते हैं वो तो किसी तरह इस मुश्किल को झेल लेते हैं लेकिन जो अंग्रेजी में कमजोर होते हैं उनके पास अच्छे सपने और सपनों को पूरा करने का कोई अधिकार नहीं होता है।

आज लोग हिंदी की जगह हिंगलिश बोलते हैं। आप अपने चारों ओर नजर घुमा कर देखिये आपको पता लग जायेगा कि हम सही है। केवल आम जिंदगी ही नहीं हमारे मनोरंजन के साधनों में भी हिंगलिश का बोल-बाला है। मसलन फिल्मों को ही ले लीजिये, द डर्टी पिक्चर, काईटस, रॉकस्टार, नो वन किल्ड जेसिका, वांटेड, रेडी, बॉडीगार्ड, रा वन, हिरोईन, इश्क इन पेरिश तमाम ऐसे उदाहरण हैं जो आपको बता देंगे कि आज लोग हिंदी की जगह हिंदी-इंगलिश मिला कर बोलते हैं।
मशहूर कवि डा. कुमार विश्वास ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है कि हिंदी के बड़े बड़े बेटे जो समय की दृष्टि से असंगत-ताल कर दिए गए,सदा अभाव के भाव-बोध के साथ याद किये जाते हैं ! बड़ा अजीब व्याकरण हैं आलोचकों की दृष्टी-सृष्टि का ,समय की तुला से बाहर छलक जाओ तो समय को ही दोष देते रहेंगे कि "आप ने सही नहीं तोला समय-देव"और उचक कर अदबद कर जगह बना लो तो आप को कुह लायेंगे कि "बड़े पाजी हो जी! खुद ही जमे जा रहे हो !"
यही नहीं आज जागरूकता अभियान के तहत भी हिंदी को लेकर कहीं बातें नहीं होती हैं, जहां होती हैं उसे हमारे टीवी चैनल वाले कवर नहीं करते हैं। चाहें तो आप खुद देख लीजिये। हिंदी दिवस के मौके पर केवल डीडी न्यूज को छोड़कर कौन सा चैनल आपको कोई कार्यक्रम दिखा रहा होगा। सारे चैनल हिंदी के सेमिनार की बजाय बराक ओबामा के चुनावी अभियान को दिखाना पसंद करते हैं।
यह तस्वीर है आज की जो हमने आप के सामने पेश की। इसे पढ़ने के बाद अगर आज के दिन आप खुद से और अपने लोगों से करीब दस हिंदी शब्दों का प्रयोग करके भी बात कर लें तो हमारा लिखना सफल हो जायेगा और हिंदी भाषा के साथ थोड़ा इंसाफ हो जायेगा।












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