Hartalika Teej 2021: जानिए गर्भवती महिलाएं कैसे करें 'हरतालिका तीज' का व्रत?
नई दिल्ली, 09 सितंबर। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को 'हरतालिका तीज' का पर्व होता है। इस दिन महिलाएं बिना पानी के व्रत रखती हैं और शाम को भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करती हैं। उत्तर भारत में ये व्रत कुंवारी लड़कियां भी करती हैं। कहा जाता है कि ये व्रत करने से लड़कियों को अच्छे पति की प्राप्ति होती हैं और सुहागिनों का सुहाग लंबी उम्र वाला होता है।
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गर्भवती महिलाएं ऐसे रखें 'हरतालिका तीज' व्रत
ये बेहद ही कठिन व्रत है क्योंकि ये उपवास निर्जला रखा जाता है,ऐसे में जो महिलाएं गर्भवती हैं उन्हें इस व्रत को लेकर कुछ विशेष बातों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। क्योंकि गर्भवती महिलाओं का ज्यादा देर तक भूख रहना सही नहीं है क्योंकि ऐसा करना उनके और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

हल्का फलाहार और जूस का सेवन
- वैसे हो सके तो गर्भवती महिलाएं ये व्रत करने से बचें लेकिन अगर व्रत रखना बहुत ज्यादा जरूरी है तो वो पानी पीकर व्रत करें, अगर वो भी संभव ना हो तो पूजा जल्दी कर लें और उसके बाद पानी अवश्य पी लें।
- पूजा करने के बाद हो सके तो हल्का फलाहार और जूस का सेवन करें।
- चाय या मिठाई का ज्यादा सेवन उचित नहीं है क्योंकि इससे शिशु की सेहत को नुकसान हो सकता है।

भागदौड़ ना करें गर्भवती महिलाएं
- गर्भवती महिलाओं को रात्रिजागरण से बचना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को बहुत देर तक बैठने से भी बचना चाहिए इसलिए वो कोशिश करें कि पूजा में ज्यादा देर तक ना बैठें।
- गर्भवती महिलाओं को व्रत के लिए भागदौड़ भी नहीं करनी चाहिए।

हरितालिका तीज पूजा का वक्त
- तृतीया तिथि प्रारंभ 8 सितंबर को रात्रि 2.34 बजे से
- तृतीया तिथि पूर्ण 9 सितंबर को रात्रि 12.19 बजे तक
- 9 सितंबर को सूर्योदय पूर्व से लेकर अर्द्धरात्रि र्पयत तक तृतीया तिथि रहेगी।
क्या है 'हरतालिका तीज' का अर्थ?
'हरतालिका दो शब्दों से बना है, हरित और तालिका। हरित का अर्थ है हरण करना और तालिका अर्थात सखी। यह पर्व भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, जिस कारण इसे तीज कहते है। इस व्रत को 'हरतालिका तीज' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि मां पार्वती को उनकी सखी ने उनके पिता हिमालय के घर से हरण किया था और उसके बाद वो उन्हें जंगल में ले गई थीं और इस के बाद पार्वती जी ने मिट्टी के शिव बनाकर उसके सामने बैठकर बिना खाए-पिए कठिन तपस्या की थी, जिसके बाद उन्हें शिव पति के रूप में प्राप्त हुए थे। इसलिए इस व्रत का खासा महत्व है।












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