Hal Shashthi Vrat 2023 or Balaram Jayanti: आज है 'हलछठ' व्रत? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त
Hal Shashthi Vrat 2023 : भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्मदिवस कृष्ण पक्ष की अष्टमी के ठीक दो दिन पहले यानी कि षष्ठी को मनाया जाता है। इस दिन को 'हलछठ' या 'बलराम जयंती' या फिर 'ललई छठ' के रूप में जाना जाता है। इस दिन मांएं अपने पुत्र की लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं और छठी माता की पूजा करती हैं, कहते हैं जिनको संतान नहीं है अगर वो भी इस पूजा को करें तो निश्चित रूप से उनके घर का आंगन भी खिल उठता है। इस व्रत को यूपी और बिहार के लोग प्रमुखता से मनाते हैं।

शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष के दौरान आने वाली षष्ठी तिथि 4 सितंबर 2023 को 4.41 PM बजे से शुरू होगी और दूसरे दिन यानी कि 5 सितंबर 2023 को 3.36 PM पर खत्म होगी। आपको बता दें कि जब तक माएं छठ की पूजा नहीं कर लेती हैं, तब तक वो पानी की एक बूंद पानी तक नहीं पीती हैं।
भैंस के दूध का सेवन किया जाता है
बलराम जी की शस्त्र हल है और इसी कारण इसे 'हलछठ' कहते हैं और इसी वजह से इस व्रत में हल से जुती हुई चीजों का सेवन नहीं किया जाता है। इस व्रत में गाय के दूध का नहीं बल्कि भैंस के दूध का सेवन किया जाता है और साथ ही तालाब से उगने वाली चीजों का प्रयोग किया जाता है। छठ माता को छह तरह के दाने चढ़ते हैं और उनकी पूजा परात में की जाती है।
पूजा विधि
- सबसे पहले नहाधोकर उठकर नहाधोकर स्वच्छ कपड़े पहनें।
- ये व्रत मुख्य रूप से पुत्रव्रती महिलाएं ही करती हैं।
- घर की दीवार पर 'हर छठ माता' का चित्र बनाया जाता हैं।
- मां को 6 तरह के दानों और पुड़ी का भोग लगता है वो भी मिट्टी के दोनों में।
- पूजा के बाद 'हर छठ' माता की कथा पढ़ी जाती हैं।
- फिर 'हर छठ' माता की आरती होती है।
- और बच्चों को काजल लगाया जाता है और प्रसाद बांटा जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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