Hal Chhath 2025 : हलषष्ठी व्रत आज, जानिए कथा और पूजा विधि

Hal Chhath 2025: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन हलछठ का व्रत किया जाता है। इसे हरछठ या हलषष्ठी व्रत भी कहा जाता है। यह व्रत आज किया जा रहा है। इस दिन को बलराम षष्ठी के रूप में बलराम जी के जन्मदिवस के रूप में किया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर संतान की दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करती हैं।

इस दिन माताएं हल से जुती हुई जमीन से उगे अनाज आदि का सेवन नहीं करती हैं। आपको बता दें कि उत्तर भारत जैसे यूपी-बिहार में ये व्रत जन्माष्टमी के दो दिन पहले किया जाता है।

Hal Chhath 2025

इस साल ये व्रत इन राज्यों में 14 अगस्त को किया गया था लेकिन एमपी और राजस्थान में ये व्रत आज किया जा रहा है। हलछठ का व्रत विशेषकर माताएं अपनी संतानों के अच्छे स्वास्थ्य, उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं।

यह पर्व कृषि से जुड़ा हुआ है (Hal Chhath 2025)

इस दिन खेत-खलिहान से जुड़ी वस्तुओं का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह पर्व कृषि से भी जुड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन हल चलाना, खेत जोतना और धरती में हल का प्रयोग करना वर्जित रहता है। हल से उगने वाले अनाज जैसे गेहूं, जौ आदि का सेवन भी निषेध रहता है। इसके स्थान पर माताएं दूध, दही, गुड़ और फल का सेवन करती हैं।

व्रत की पूजा विधि (Hal Chhath 2025)

हलछठ के दिन प्रातः स्नान के बाद महिलाएं व्रत रखती हैं। मिट्टी या गोबर से हल, बैल और खेत की आकृति बनाकर समस्त द्रव्यों से उनकी पूजा करती हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का पूजन किया जाता है। पूजा में विशेष रूप से षष्ठी माता का आवाहन कर बालकों की रक्षा और उन्नति की कामना की जाती है।

हलछठ व्रत की कथा (Hal Chhath 2025)

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तभी बलराम जी का भी जन्म हुआ था। बलराम जी को हलधर कहा गया क्योंकि उनका प्रिय अस्त्र हल था। इसी कारण कृषि कार्य में हल का अत्यधिक महत्व माना गया। एक कथा यह भी है कि जब श्रीकृष्ण के बाल्यकाल में षष्ठी माता ने उनकी रक्षा की थी, तभी से यह व्रत बच्चों की सुरक्षा के लिए करने की परंपरा बन गई।

यह विशेष उपाय अवश्य करें

अपने घर के पूजा स्थान में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर मिट्टी के कलश में गेहूं या चावल भरकर इस पर मिट्टी का एक दीया रखें। इस पर घी का दीपक लगाएं और बलराम स्तोत्र का पाठ करें। इससे संतान की दीर्घायु प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

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