Guru Purnima 2024: कौन थे वेदव्यास? क्यों मनाते हैं गुरु पूर्णिमा? जानिए महत्व
Guru Purnima 2024 Kyo manate hai: आषाढ़ मास के पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा होती है, इस बार ये पर्व 21 जुलाई को है। इस दिन गुरुओं को धन्यवाद देने के अलावा भगवान विष्णु की भी पूजा करने की प्रथा है।
ये दिन बहुत ज्यादा पावन है। पूर्णिमा के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं, कहते हैं कि ऐसा करने से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हमारे देश में जितने भी पर्व मनाए जाते हैं, उसके पीछे कुछ ना कुछ कारण होता है इसलिए गुरु पूर्णिमा तो भी मनाने के पीछे कुछ खास वजह हैं, चलिए विस्तार से जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा क्यों मनाते हैं?
गुरु पूर्णिमा क्यों मनाते हैं? (Guru Purnima 2024 Kyo manate hai)
माना जाता है कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के दिन महाभारत के रचयिता वेद व्यास का जन्म हुआ था, इसलिए गुरु पूर्णिमा उन्हीं को समर्पित है, इसी कारण इस पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। उन्हें लोग भगवान विष्णु का ही स्वरूप मानते हैं,वो ही सबसे बड़े गुरु माने गए हैं।
वेद व्यास ने भागवत पुराण का महत्व बताया था
कुछ पुराणों में ये भी जिक्र है कि आषाढ़ पूर्णिमा को ही वेद व्यास ने भागवत पुराण का महत्व बताया था, इसलिए इस दिन भगवत पुराण के श्वलोक का भी जाप करना चाहिए।
- वासुदेव सुतं देवम् कंस चानुर मर्दनम् देवकी परमानंदम् कृष्णम् वंदे जगदगुरुम्।
- आदौ देवकी देव गर्भजननं, गोपी गृहे वद्र्धनम्।
- माया पूज निकासु ताप हरणं गौवद्र्धनोधरणम्।।
- कंसच्छेदनं कौरवादिहननं, कुंतीसुपाजालनम्।
- एतद् श्रीमद्भागवतम् पुराण कथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम्।।
- अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्ण:दामोदरं वासुदेवं हरे।
- श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे।।
वेदव्यास जी को समर्पित है ये श्लोक
- व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे।
- नमो वै ब्रह्मनिधये वसिष्ठाय नमो नम:।।
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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