Gayatri Mantra in Hindi: पढ़ें गायत्री मंत्र का अर्थ और जपने के फायदे
नई दिल्ली, 10 मई। हर कोई अपने ईष्टदेव की अलग-अलग मंत्रों से पूजा करता है, बहुत सारे मंत्र बहुत प्रभावी भी होते हैं, ऐसा ही एक मंत्र है 'गायत्री मंत्र', जिसके जाप मात्र से इंसान की सारी बाधाओं का अंत हो जाता है।

गायत्री मंत्र:
ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
गायत्री मंत्र का अर्थ:
प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं, ईश्वर का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

गायत्री मंत्र के लाभ:
मां गायत्री का रूप सरस, मोहक और अनुपम है, मां की साधना करने से जातक भयमुक्त, चिंतामुक्त, क्रोधमुक्त और कर्जमुक्त हो जाता है। मां गायत्री अपने भक्तों को धैर्य, साहस और ऊर्जावान बनाती हैं। गायत्री मंत्र के जाप से इंसान के सारे दुख और भय समाप्त हो जाता है। इंसान के उत्साह और साहस में वृद्धि होती है। इंसान खुश, सुखी और वैभव प्राप्त करता है।

गायत्री मंत्र जाप करने का समय:
वैसे को मां की पूजा तभी होती है, जब आप उन्हें सच्चे मन से याद करें और उसके लिए कोई समय फिक्स नहीं है लेकिन फिर भी धर्मशास्त्रों में गायत्री मंत्र के जाप का तीन समय बताया गया है।
- पहला समय: सूर्योदय से पहले यानी भोर में
- दूसरा समय: दोपहर के वक्त
- तीसरा समय: सूर्यास्त के बाद
कौन है मां गायत्री
मां गायत्री की उत्पत्ति चारों वेदों से हुई हैं इसलिए कहा जाता है कि या तो आप चारों वेद पढ़ लीजिए या फिर मां गायत्री का ध्यान कर लीजिए। चारों वेदों की पूजा करने से जिस पुण्य की प्राप्ति होती है वो ही पुण्य मां गायत्री की सच्चे हृदय से पूजा करने पर प्राप्त होता है। दूसरे शब्दों में मां गायत्री को हिंदी संस्कृति की जन्मदात्री माना जाता है, जो कि बेहद ही सरस और कोमल हैं। शास्त्रों मे वर्णन है कि मां गायत्री सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी की पत्नी हैं, जिनकी उत्पत्ति एक धार्मिक कार्य के मद्दनेजर हुई थी। ब्रह्माजी ने मां गायत्री की वर्णन अपने चारों मुखों से चार वेदों के रूप में किया है यानी की मां गायत्री को ज्ञान का भंडार कहा जाता है।












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