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Ganesha Festival 2019: इस बार घरों में विराजे मिट्टी के गणपति, जानिए क्यों?

बेंगलुरु। पूरा देश इस वक्त गणेश उत्सव में डूबा हुआ है, हर आम से लेकर खास तक सभी बप्पा की मस्ती में रंगे दिखे, 2 सितंबर से आरंभ हुआ गणेश उत्सव अब अपने अंतिम दौर में है, लोगों के घरों में कहीं 1, कहीं 3 तो कहीं 5 दिन गणपति विराजे हैं, लोगों ने उत्साह, भरोसे और विश्वास के साथ अपने घरों में बप्पा की पूजा की है, इस बार खास बात ये देखने को मिली कि अधिकांश लोगों के घरों में इस बार मिट्टी के गणपति विराजे हैं, लोगों ने इस बार श्रद्धा के साथ पर्यावरण का भी ख्याल रखा है।

घरों में विराजे मिट्टी के गणपति

घरों में विराजे मिट्टी के गणपति

इस बारे में बात करते हुए बेंगलुरु, कर्नाटक की रहने वाली आशु ने कहा कि हम मिट्टी के गणेश जी को घर लाए और 5 दिन तक उनकी आराधना की है, अब अब जब इन्हें विसर्जित करेंगे तो उस मिट्टी का प्रयोग हम अपने घरों के पौधों के लिए करेंगे, इस तरह से हम परंपरा के साथ-साथ श्रद्दा और पर्यावरण का भी ख्याल रख पाते हैं। बप्पा की मिट्टी से तैयार पौधों से हमारी भावनाएं भी जुड़ जाती हैं जो कि हमें प्रकृति के और भी करीब ले आती है।

कुछ खास बातें

कुछ खास बातें

वैसे आपको बता दें कि इस बार गणपति उत्सव का पर्व 2 सितंबर से शुरू होकर 12 सितंबर तक है,जिसका अर्थ ये हुआ कि 12 सितंबर को गणेश विसर्जन होगा।वैसे तो गणपति कहीं एक दिन, कहीं 3 दिन, कहीं 5, 7 दिन या कहीं पूरे 10 दिन तक विराजते हैं, लेकिन गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ गणेश उत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन ही खत्म होता है और इस बार अनंत चतुर्दशी 12 सितंबर को है।

अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

  • सुबह - प्रातः 06:16 से प्रातः 07:48 तक
  • फिर प्रातः 10:51 से प्रातः 03:27 तक
  • दोपहर मुहूर्त - शाम 04:59 से शाम 06:30 तक
  • शाम मुहूर्त (अमृता, चर) - प्रातः 06:30 अपराह्न से 09:27 बजे
  • रात्रि मुहूर्त (लब) - 12:23 AM से 01:52 AM, 13 सितंबर
  • चतुर्दशी तिथि शुरू होती है - 05:06 AM 12 सितंबर, 2019 को
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त - 07:35 AM 13 सितंबर, 2019 को
क्या है 'विसर्जन'?

क्या है 'विसर्जन'?

'विसर्जन' शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है कि 'पानी में विलीन होना', ये सम्मान सूचक प्रक्रिया है इसलिए घर में पूजा के लिए प्रयोग की गई मूर्तियों को विसर्जित करके उन्हें सम्मान दिया जाता है।

अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी का व्रत किया जाता है। इस दिन अनंत के रूप में हरि की पूजा होती है। पुरुष दाएं तथा स्त्रियां बाएं हाथ में अनंत धारण करती हैं। अनंत राखी के समान रूई या रेशम के कुंकू रंग में रंगे धागे होते हैं और उनमें चौदह गांठे होती हैं। इन्हीं धागों से अनंत का निर्माण होता है।

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