Ganadhipa Sankashti Chaturthi 2024 Today: गणाधिप संकष्टी चतुर्थी आज, जानिए क्या है पूजा मुहूर्त?

Ganadhipa Sankashti Chaturthi 2024: आज पूरे देश में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है, कहते हैं कि आज के दिन जो कोई भी भगवान गणेश की पूजा सच्चे मन से करता है तो उसकी सारी समस्याओं का अंत तुरंत हो जाता है। संकष्टी चतुर्थी का शाब्दिक अर्थ है 'संकट से मुक्ति दिलाने वाली चतुर्थी'।

इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। मालूम हो कि गणेश जी को बुद्धि, ज्ञान और शुभ फल प्रदान करने वाला देवता माना गया है।

Ganadhipa Sankashti Chaturthi 2024 Today

आपको बता दें कि संकष्टी चतुर्थी की तिथि आज 6:55 PM पर शुरू होगी और तिथि का समापन 19 नवंबर को 5:28 PM पर होगा लेकिन पूजा आज ही की जाएगी। चंद्रोदय का समय 7 :34 PM है।

व्रत और पूजन विधि ( Sankashti Chaturthi 2024 Puja Vidhi)

  • संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होता है।
  • भक्त पूरे दिन अन्न ग्रहण नहीं करते और केवल फल, दूध या पानी का सेवन करते हैं।
  • शाम को पहले गणेश जी की पूजा की जाती है
  • और उसके बाद चंद्रदेव को अर्ध्य दिया जाता है।
  • गणेश जी को लाल पुष्प, दूर्वा, मोदक, और धूप-दीप चढ़ाने चाहिए।
  • भगवान गणेश के मंत्र जैसे "ॐ गण गणपतये नमः" का जाप किया जाता है।
  • पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। तभी पूजा पूरी होती है।
  • यदि चतुर्थी तिथि सोमवार या मंगलवार को पड़ती है, तो इसे और भी शुभ माना जाता है। इसे 'अंगारकी संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है।
Ganadhipa Sankashti Chaturthi 2024 Toda

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा ( Sankashti Chaturthi 2024 Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और ऋषियों ने भगवान गणेश से प्रार्थना की कि वे उन्हें उनके कष्टों से मुक्ति दिलाएं। गणेश जी ने उन्हें संकष्टी चतुर्थी व्रत का पालन करने का सुझाव दिया। इसके बाद सभी ने इस व्रत का पालन किया और अपने संकटों से मुक्ति पाई।

गणेश जी आरती ( Lord Ganesha Aarti)

  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
  • माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
  • लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
  • बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • 'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
  • कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय
  • आरती के बाद इस मंत्र का जप करें
  • वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
  • मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥
  • गजाननं भूत गणादि सेवितं,
  • कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।
  • उमासुतं शोक विनाशकारकम्,
  • नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ॥

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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