आखिर दिवाली के पावन पर्व में क्यों खेला जाता है जुआ?

दिवाली की रात... काफी लोग जुआ खेलते हैं और अपने पैसों का सर्वनाश करते हैं जिसके चलते बहुत लोगों की दिवाली काली हो जाती है

नई दिल्ली। दिवाली रोशनी और उल्लास का पर्व है, ये बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है तो वहीं ये मन के अंधकार को दूर करने की सीख देता है लेकिन कहते हैं ना हर चीज के साथ कुछ अच्छी और बुरी बातें जुड़ी होती हैं इसलिए इस त्योहार के साथ भी कुछ ऐसा ही है, जिसे किसी भी लिहाज से अच्छा नहीं कहा जा सकता है।

और वो बात है जुआ खेलना, दिवाली की रात... काफी लोग जुआ खेलते हैं और अपने पैसों का सर्वनाश करते हैं जिसके चलते बहुत लोगों की दिवाली काली हो जाती है।

क्या है कहानी

ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन भगवान शिव और पार्वती ने भी जुआ खेला था, तभी से ये प्रथा दिवाली के साथ जुड़ गई है। हालांकि शिव और पार्वती द्वारा दिवाली पर जुआ खेलने का ठोस तथ्य किसी ग्रंथ में नहीं मिलता।

जुआ खेलने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं?

लोगों का ऐसा भी मानना है कि जुआ खेलने से माता लक्ष्मी आप पर प्रसन्न होती है और आपके पास से कहीं नहीं जाती है लेकिन क्या ऐसा संभव है कि भगवान किसी बुराई वाली चीज पर खुश होते हों लेकिन परंपराओं के बारे में आप किसी से बहस नहीं कर सकते हैं।

इसलिए लोगों केे लिए यही संदेश है कि जुआ खेलना अच्छी बात नहीं होती...आप अपने पैसों से किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं बजाय कि आप अपनी गाढ़ी कमाई जुए में गंवाएं...इसलिए विवेक से काम लें और बेहतर होगा कि इस गंदी चीज में साथ ना दें।

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