First Sawan Somwar 2025: सावन के सोमवार पर करें 'शिवलिंग महाव्रत', हर मनोकामना होगी पूरी

First Sawan Somwar 2025 Hindi: भगवान शिव से जुड़े अनेक व्रत और पूजा विधियां हैं लेकिन शिवलिंग महाव्रत एक ऐसा विधान है, जिसे श्रावण में प्रत्येक सोमवार को किया जाता है और इसे करने से मनुष्य जीते जी समस्त सुख और ऐश्वर्य प्राप्त करता है और मृत्यु के बाद उसका पुनर्जन्म नहीं होता और वह शिव में स्थापित होकर संपूर्ण मोक्ष को प्राप्त हो जाता है।

First Sawan Somwar 2025

क्या है शिवलिंग महाव्रत ( First Sawan Somwar 2025)

शिवलिंग महाव्रत का वर्णन शिव महापुराण में मिलता है। इसमें कहा गया है कि इस महाव्रत का अनुष्ठान अनेक देवताओं ने किया था। इस व्रत को करने से ही समस्त देवताओं को देवत्व प्राप्त हुआ। ब्रह्मा को ब्रह्मत्व, विष्णु को विष्णुत्व, रुद्र को रुद्रत्व, इंद्र को इंद्रत्व और गणेश को गणेशत्व की प्राप्ति हुई। यह महाव्रत मुख्य रूप से परलोक में फल देने वाला ही बताया गया है।


कैसे करें शिवलिंग महाव्रत (First Sawan Somwar 2025)

यह महाव्रत श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को किया जाता है। वैसे यह व्रत किसी भी मास में किया जाता है किंतु श्रावण में इसका महत्व अधिक है। स्नानादि से निवृत्त होकर साधक श्वेत वस्त्र पहनें और फिर एक चौकी पर नया कपड़ा बिछाकर उस पर पद्मासन स्थापित करें। पद्मासन श्वेत कमल पुष्प का होना चाहिए। यदि सामर्थ्य हो तो स्वर्ण या रत्न का पद्मासन बनवाना चाहिए। इसके मध्य में अंगुष्ठ के आकार का शिवलिंग स्थापित करें। श्वेत चंदन युक्त जल से स्नान करवाकर श्वेत कमलों द्वारा पूजन करें। बिल्वपत्रों से पूजन करें। शिवलिंग के दक्षिणभाग में अगरु, पश्चिम में मैनसिल, उत्तरभाग में चंदन और पूर्व भाग में हरिताल चढ़ाएं। फिर अनेक प्रकार के सुंदर सुगंधित पुष्पों से पूजन करें। सब ओर काले अगुरु और गुग्गुल की धूप दें। अत्यंत महीन और निर्मल वस्त्र निवेदन करें। घृत मिश्रित खीर का भोग लगाएं। पूजा के समय घी का दीपक जलाकर रखें। मंत्रोच्चार पूर्वक सबकुछ चढ़ाकर परिक्रमा करें। प्रणाम कर उनकी स्तुति करें और अंत में त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

क्यों किया जाता है शिवलिंग महाव्रत ((First Sawan Somwar 2025)

शिवलिंग महाव्रत मुख्यरूप से जन्म-मृत्यु के बंधनों से मुक्ति के लिए किया जाता है। श्रावण मास में संकल्प लेकर जो मनुष्य यह महाव्रत करता है उसके जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और वह जब तक पृथ्वी पर जीवित रहता है स्वयं शिव उसकी रक्षा करते हैं और मृत्यु के बाद वह मनुष्य शिव के परमधाम पहुंच जाता है और उनका गण बन जाता है। ऐसे मनुष्य का दोबार मृत्युलोक में जन्म नहीं होता।

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