Sawan 2025: नर्मदेश्वर लिंग कैसे उत्पन्न हुआ? क्या है इसके पीछे की कहानी?
Sawan 2025: शास्त्रों में सप्तनदियों में नर्मदा का भी महत्वपूर्ण स्थान है। नर्मदा सिर्फ नदी नहीं यह शिव की प्रिय है और इसीलिए नर्मदा परिक्रमा करके मनुष्य अपनी सात पीढ़ियों को तार देता है। नर्मदा जीवनदायिनी तो है ही इसकी भक्ति करने से मनुष्य को जीते जी समस्त सुख-भोग प्राप्त होते हैं और मृत्यु के बाद मनुष्य शिव के परमधाम को प्राप्त करता है। नर्मदा का इतना पुण्य है कि वर्ष में एक बाद स्वयं गंगा भी नर्मदा में आकर पुण्यलाभ प्राप्त करती हैं।
नर्मदा नदी में पाया जाने वाला प्रत्येक कंकर स्वयं शंकर है। इसलिए नर्मदा नदी में पाए जाने वाले स्वयंभू लिंगों को नर्मदेश्वर लिंग कहा जाता है और देश-दुनिया में अनेक मंदिरों और घरों में नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित है।

श्रावण मास में नर्मदेश्वर शिवलिंग के पूजन, अभिषेक और स्पर्श के अनेक लाभ बताए गए हैं। नर्मदेश्वर शिवलिंग में प्राकृतिक रूप से जो धारियां पाई जाती हैं वे शिव की शक्तियों की प्रतीक है। तो आइए जानते हैं नर्मदेश्वर लिंग का इतना महत्व क्यों है-
नर्मदेश्वर लिंग कैसे उत्पन्न हुआ? (Sawan 2025)
नर्मदेश्वर शिवलिंग के जुड़ी एक कथा शिवमहापुराण के द्वितीय खंड की कोटिरुद्र संहिता के सातवें अध्याय में मिलती है। इसके अनुसार एक समय एक ब्राह्मण था, उसकी ऋषिका नामक कन्या थी। उसने कम आयु में ही अपनी कन्या का विवाह एक ब्राह्मण पुत्र से कर दिया था। पूर्वजन्म के प्रभाव से वह कन्या बाल्यावस्था में ही विधवा हो गई। इसके बाद वह अपने पिता के घर आकर पतिव्रत धर्म का पालन करती हुई शिवभक्ति में लीन रहने लगी।
क्रोधित होकर दैत्य ने भयंकर गर्जना की
एक दिन वह नर्मदा नदी के तट पर रेत से शिवलिंग बनाकर तपस्या कर रही थी। तभी मूढ़ नामक एक मायावी दैत्य वहां आया और बालिका के रूप सौंदर्य से मोहित होकर उसे अपने साथ चलने के लिए कहने लगा। बालिका तपस्या में लीन थी तो उसने दैत्य पर ध्यान नहीं दिया। इससे क्रोधित होकर दैत्य ने भयंकर गर्जना की। जिससे बालिका की तपस्या भंग हुई और वह भयभीत हो गई। भयभीत होकर वह शिवजी को पुकारने लगी। तब ब्राह्मणी की रक्षा के लिए शिवजी प्रकट हो गए। शिवजी ने कामपीड़ित उस दैत्य को वहीं भस्म कर दिया।
' हे सदाशिव मुझे सदैव अपने चरणों की भक्ति प्रदान करें '
इसके बाद शिवजी ने उस बालिका को वर मांगने के लिए कहा। ऋषिका ने आग्रह किया कि हे सदाशिव मुझे सदैव अपने चरणों की भक्ति प्रदान करें और समस्त सृष्टि के कल्याण के लिए नर्मदा में सदैव विराजमान रहें। तब से शिवजी नर्मदा में लिंग के रूप में स्थापित हो गए और नर्मदा का प्रत्येक कंकर शंकर हो गया। इसीलिए नर्मदा नदी में पाए जाने वाले शिवलिंग को ही अधिकांश मंदिरों और घरों में स्थापित किया जाता है। उसी समय वहां ब्रह्मा, विष्णु आदि प्रकट हो गए और ऋषिका को आशीर्वाद प्रदान किया।
नर्मदा नदी में पाया जाने वाला प्रत्येक पत्थर साक्षात शिव का स्वरूप
उसी समय वहां गंगा भी प्रकट हुई और शिवजी से वर्ष में एक दिन नर्मदा के साथ निवास करने की अनुमति मांगी। इस प्रकार नर्मदा नदी में पाया जाने वाला प्रत्येक पत्थर कोई साधारण पत्थर नहीं है वह साक्षात शिव का स्वरूप है। इसलिए नर्मदा परिक्रमा करके साक्षात शिव की परिक्रमा का पुण्य प्राप्त किया जाता है।












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