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Ekadashi Aaj hai: विजया एकादशी आज, जानिए मुहूर्त, विधि, महत्व और कथा

Ekadashi Aaj hai: आज फाल्गुन मास की शु्क्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे कि 'विजया एकादशी' भी कहते हैं। आज का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, माना जाता है कि इस दिन जो भी भगवान विष्णु की पूजा पूरे सच्चे मन से करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है, वो हर काम में सफल होता है और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों के अनुसार यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक है, बल्कि शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए भी लाभकारी माना गया है। आज का पूरा दिन बेहद ही पावन है। पद्म पुराण और स्कन्द पुराण में भी एकादशी व्रत का जिक्र हुआ है।

Ekadashi Aaj hai

विजया एकादशी पूजा मुहूर्त (Ekadashi Puja Muhurat)

फाल्गुन मास की एकादशी तिथि की प्रारंभ 23 तारीख से ही प्रारंभ हो गया था जो कि आज 1 बजकर 44 मिनट पर समाप्त हो रहा है, उदयातिथि मान्य होने की वजह से एकादशी का व्रत आज रखा गया है। वैसे तो विष्णु जी की पूजा आप कभी भी कर सकते हैं लेकिन विजय मुहूर्त में पूजा करने से व्रत का दोगुना लाभ मिलता है।

  • विजय मुहूर्त : दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त : शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 40 मिनट तक

एकादशी व्रत की पूजा विधि (Ekadashi Puja Vidhi)

  • प्रातःकाल जल्दी उठकर गंगा जल या पवित्र जल से स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीप जलाएं, धूप-अगरबत्ती अर्पित करें और पीले फूल चढ़ाएं।
  • एकादशी व्रत की महिमा को समझने के लिए इसकी कथा का पाठ करें।
  • इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
  • एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर आशीर्वाद लें।

एकादशी व्रत के लाभ (Ekadashi Aaj hai)

  • यह व्रत मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
  • यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
  • इस उपवास से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इस उपवास से पारिवारिक सुख और समृद्धि बढ़ती है।

एकादशी व्रत कथा (Ekadashi Vrat Katha)

एक पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रावती राज्य में एक धनपाल नामक वैश्य रहता था, जो बहुत ही धर्मपरायण और दयालु था। धनपाल के पांच पुत्र थे, जिनमें से सबसे छोटा पुत्र, 'माधव' अधर्मी था। वह हमेशा पापपूर्ण कार्यों में लिप्त रहता था।

माधव का गलत आचरण देखकर उसके माता-पिता और भाई-बहनों ने उसे घर से निकाल दिया। वह भूखा-प्यासा इधर-उधर भटकने लगा। एक दिन वह महर्षि कौंडिन्य के आश्रम में पहुंचा और अपनी कहानी सुनाई। महर्षि ने उसे विजया एकादशी व्रत करने की सलाह दी।

व्रत के प्रभाव से उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया

माधव ने पूरे श्रद्धा भाव से एकादशी व्रत रखा। इस व्रत के प्रभाव से उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया। धीरे-धीरे उसने अपने सभी पापों का प्रायश्चित किया और भगवान विष्णु की कृपा से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बात करें।

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