Dussehra 2024: क्यों रावण को कहते हैं 'दशानन'? क्या है उसके 10 सिरों का मतलब?
Dussehra 2024: आज पूरा भारत दशहरे का पर्व मना रहा है, ये पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। ये त्योहार हमें सिखाता है कि आप चाहे जितने बड़े विद्धान और शक्तिशाली हों लेकिन अगर आप अधर्म के रास्ते पर चलेंगे तो आपका विनाश निश्चित ही है।
रावन बहुत सारी अलौकिक शक्तियों का मालिक था। वो शास्त्र और शस्त्र दोनों में पारंगत था।भगवान शिव का भक्त और सोने की लंका का मालिक था।

लेकिन महाअभिमानी और अधर्मी था, उसने धोखे से सीता मां का अपरहरण किया, जिसकी वजह से उसका खात्मा हुआ।वो बेहद ही मायावी और 65 प्रकार की कलाओं को जानता था। उसके 10 सिर थे और इसी कारण उसे दशानन भी कहा जाता है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में रावण के हर सिर का अर्थ समझाया है।
तुलसीदास के मुताबिक रावण के 10 सिर यानी कि 10 बुराईयां हैं...
- काम,
- क्रोध,
- लोभ,
- मोह,
- मद,
- मत्सर,
- वासना,
- भ्रष्टाचार,
- अहंकार
- अनैतिकता
कहा जाता है कि रावण अलग योनी से जन्मा था और इसी कारण उसे दस सिर मिले थे। भगवान शिव ने उससे कहा था कि उसका अंत सिर कटने से नहीं बल्कि नाभी पर वार करने से होगा और यही बात विभिषण ने भगवान राम को युद्ध के वक्त बताई थी।
खास बात
दशहरा को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसी दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। ये पर्व अहंकार, अधर्म और अन्याय के विनाश का संदेश देता है। दशहरा पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है।
उत्तर भारत में, विशेषकर वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में रावण दहन के बड़े आयोजन होते हैं। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के बाद की विजया दशमी मनाई जाती है, जिसमें देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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