Dussehra Chalisa- Aarti: सुख-शांति चाहिए तो जरूर करें इस चालीसा और आरती का पाठ
Dussehra Chalisa- Aarti: आज अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक दशहरा पूरे भारत में मनाया जा रहा है। इसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है।
यह अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। आज के दिन दशहरा चालीसा और आरती का पाठ जरूर करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इंसान के घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

दशहरा चालीसा (Dussehra Chalisa)
दोहा
- श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन, हरण भव भय दारुणम्।
- नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥
- दशरथ नंदन कौशल्या, रामचंद्र जगत पतित पावन।
- धन्य अयोध्या नगरी राम के चरणों से अविनाशी॥
चौपाई
- जयति जयति श्री रामलला, जय सिया पति दीनदयाला।
- रावण वध करि कीन अचंभा, जग में प्रकट भयो परंब्रह्मा॥
- सीता हरण करि लंकेस, सिया धीर व्रत धर्म की धारा।
- राम कीन तव बंधु सँवारा, लंका जीत भुज बल भारी॥
- कृपानिधि श्री रघुकुल नायक, जय जय दशरथ पुत्र सुवायक।
- सीता पति श्री रघुवीर, जय जय लंका ध्वंस अधीर॥
- करुणा सिंधु रघुनंदन प्यारे, सिया संग लंका पर मारे।
- राम नाम की महिमा भारी, करो कृपा हनुमान सवाली॥
- दशहरा महोत्सव मनाओ, राम का जयकारा लगाओ।
- रावण संहार करे श्रीराम, भव से पार उतारें धाम॥
दशहरा आरती (Dussehra Chalisa)
- आरती की जय सियाराम जी की,
- जै जै रघुवर कृपालू।
- भव सागर से तारन हार,
- जय सियाराम कृपालू।।
- रघुकुल तिलक सूर्य समुदय,
- दशरथनंदन रामजी।
- बन में सीता संग गये,
- लखनलाल बलराम जी।।
- आरती की जय सियाराम जी की,
- जै जै रघुवर कृपालू।
- भव सागर से तारन हार,
- जय सियाराम कृपालू।।
- लंकापति के गढ़ ध्वंसन में,
- हनुमान पवनसुत बलवीर।
- लिया महा दुर्जन को मार,
- रामजी धीरधारी वीर।।
- आरती की जय सियाराम जी की,
- जै जै रघुवर कृपालू।
- भव सागर से तारन हार,
- जय सितारा कृपालू।।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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