Durga Maa ki Aarti: नवरात्रि में रोज करें दुर्गा मां की आरती, दूर होंगे सारे कष्ट
Durga maa ki Aarti: मां दुर्गा की आरती का हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। आरती केवल एक पूजा विधि नहीं, बल्कि भक्त और देवी के बीच भक्ति, श्रद्धा और ऊर्जा का माध्यम मानी जाती है। दुर्गा को शक्ति, साहस और संरक्षण की देवी माना जाता है।
आरती करने से भक्त मां से शक्ति, हिम्मत और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करता है। नवरात्रि के दिनों में तो मां की आरती दोनों टाइम करनी चाहिए इससे इंसान को हर तरह का सुख मिलता है।

अम्बे तू है जगदम्बे काली ( Ambe tu hai jagdambe Kali)
- अम्बे तू है जगदम्बे काली,
- जय दुर्गे खप्पर वाली ।
- तेरे ही गुण गाये भारती,
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
- तेरे भक्त जनो पर,
- भीर पडी है भारी माँ ।
- दानव दल पर टूट पडो,
- माँ करके सिंह सवारी ।
- सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
- अष्ट भुजाओ वाली,
- दुष्टो को पलमे संहारती ।
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
- अम्बे तू है जगदम्बे काली,
- जय दुर्गे खप्पर वाली ।
- तेरे ही गुण गाये भारती,
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
- माँ बेटे का है इस जग मे,
- बडा ही निर्मल नाता ।
- पूत - कपूत सुने है पर न,
- माता सुनी कुमाता ॥
- सब पे करूणा दरसाने वाली,
- अमृत बरसाने वाली,
- दुखियो के दुखडे निवारती ।
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
- अम्बे तू है जगदम्बे काली,
- जय दुर्गे खप्पर वाली ।
- तेरे ही गुण गाये भारती,
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
- नही मांगते धन और दौलत,
- न चांदी न सोना माँ ।
- हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,
- इक छोटा सा कोना ॥
- सबकी बिगडी बनाने वाली,
- लाज बचाने वाली,
- सतियो के सत को सवांरती ।
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
- अम्बे तू है जगदम्बे काली,
- जय दुर्गे खप्पर वाली ।
- तेरे ही गुण गाये भारती,
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
- चरण शरण मे खडे तुम्हारी,
- ले पूजा की थाली ।
- वरद हस्त सर पर रख दो,
- मॉ सकंट हरने वाली ।
- मॉ भर दो भक्ति रस प्याली,
- अष्ट भुजाओ वाली,
- भक्तो के कारज तू ही सारती ।
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
- अम्बे तू है जगदम्बे काली,
- जय दुर्गे खप्पर वाली ।
- तेरे ही गुण गाये भारती,
- ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri)
- जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
- तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ओम जय अंबे गौरी
- मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
- उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ओम जय अंबे गौरकनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
- रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ओम जय अंबे गौरी
- केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
- सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ओम जय अंबे गौरी
- कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर,
- सम राजत ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी
- शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना,
- निशिदिन मदमाती॥ ओम जय अंबे गौरी
- चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
- मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम जय अंबे गौरी
- ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
- आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ओम जय अंबे गौरी
- चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
- बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ ओम जय अंबे गौरी
- तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
- भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ ओम जय अंबे गौरी
- भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
- मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ ओम जय अंबे गौरी
- कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
- श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी
- श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
- कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥ ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी
Durga maa ki Aarti Significance: आरती का महत्व
दुर्गा को शक्ति, साहस और संरक्षण की देवी माना जाता है। आरती करने से भक्त माँ से शक्ति, हिम्मत और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करता है।आरती के दौरान दीपक, कपूर और घंटी की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है। यह माना जाता है कि इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर में सकारात्मकता आती है। सच्चे मन से आरती करने पर माँ दुर्गा भक्तों की इच्छाएं पूरी करती हैं। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान की गई आरती बहुत फलदायी मानी जाती है।












Click it and Unblock the Notifications