Durga Ashtami Vrat April 2022: दुर्गाष्टमी पर किसी दिशा में मुंह करके करनी चाहिए कुलदेवी की पूजा
नई दिल्ली, 07 अप्रैल। वर्ष में दो बार चैत्र और आश्विन नवरात्र में अष्टमी और नवमी के दिन कुलदेवी की पूजा की जाती है। इस दिन कुल परंपरा के अनुसार देवी की पूजा का विधान है। अधिकांश लोग अपने घरों में ही बंधु-बांधवों सहित कुलदेवी की पूजा करते हैं तो कई लोग कुल के मंदिरों में जाकर देवी पूजा करते हैं। यदि आप घर में कुलदेवी की पूजा कर रहे हैं तो उसमें दिशा विचार करना अत्यंत आवश्यक होता है।

अष्टमी-नवमी पर कुल देवी की पूजा करते समय पूजा करने वाले का मुंह किस दिशा में होना चाहिए यह बात अक्सर लोग पंडितों से पूछते हैं। कुलदेवी की पूजा करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है किशुक्र के उदित-अस्त की दिशा का विचार किया जाना चाहिए। शुक्र असुरों के गुरु हैं, इसलिए उनके सम्मुख होकर कुलदेवी का पूजन कभी नहीं किया जाता है। अर्थात् कुल पूजा के समय शुक्र यदि अस्त है तब तो कोई बात नहीं, किसी भी दिशा में पूजन किया जा सकता है, लेकिन यदि शुक्र उदय है तो वह किस दिशा में उदय है, यह विचार करना अत्यंत आवश्यक है। पूजन के दिन शुक्र यदि पूर्व दिशा में उदय है तो पूजन करने वालों को मुंह विपरीत दिशा में अर्थात् पश्चिम दिशा में होना चाहिए। इसी प्रकार यदि शुक्र पश्चिम दिशा में उदय है तो पूजन करने वालों का मुंह इसके विपरीत पूर्व दिशा में होना चाहिए।
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इस बार किस दिशा में
वर्तमान में शुक्र उदित है और पूर्व दिशा से गमन करते हुए आग्नेय कोण में स्थित है। इसलिए इसे पूर्व दिशा ही स्वीकार करते हुए इस बार कुलदेवी का पूजन करने वालों का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
क्या होता है प्रभाव
यदि कुलदेवी का पूजन शुक्र के सम्मुख किया जाता है तो पूजन का पूर्ण परिणाम और शुभ फल न्यून हो जाता है। शुक्र के सम्मुख देवी का मुंह होने से देवी शुक्र के दुष्प्रभाव को हर लेती हैं।












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