Dhanvantari Chalisa: आज जरूर करें धन्वंतरि चालीसा का पाठ, हमेशा रहेंगे जवां
Dhanvantari Chalisa on Dhanteras 2025: धनतेरस से ही दीपों के पर्व की शुरुआत होती है, इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व होता है। आयु, स्वास्थ्य, और समृद्धि के लिए धनतेरस पर धन्वंतरि चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। भगवान धन्वंतरि देवताओं के वैद्य हैं, जो अमृत कलश लेकर समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे।

धन्वंतरि चालीसा (Dhanvantari Chalisa)
- जय धन्वंतरि देव, जगत के स्वामी।
- रोग हरो सब, हो सुखधामी॥
- आयुर्वेद के जनक कहलाते।
- अमृत कलश संग जग में आते॥
- रोग मिटाओ, जग के पालन।
- तुम बिन नहीं कोई और समाधान॥
- विष्णु के अवतार, महिमामयी।
- स्वस्थ जीवन के वरदायी॥
- अमरत्व का वरदान दिलाते।
- जीवन की राह सरल बनाते॥
- रोग दोष सब होय समाप्त।
- धन्वंतरि चालीसा कर लो जाप॥
धन्वंतरि आरती (Dhanvantari Aarti)
- ॐ जय धन्वंतरि मुनि देव,
- जय विष्णु के अवतार।
- रोग मिटाओ जग से,
- तुम ही हो सबके आधार॥
- सुख-समृद्धि के दाता तुम,
- जीवन संजीवनी तुम।
- अमृत कलश तुम लाए,
- सबको निरोगी बनाए॥
- आरती तुम्हारी गाएं,
- रोग-बाधा सब जाए।
- जय-जय धन्वंतरि महाराज,
- भक्तों का तुम रखो लाज॥
भगवान धन्वंतरि कौन हैं
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक कहा जाता है। मान्यता है कि उन्होंने मानव जाति को रोगों से मुक्त होने का मार्ग दिखाया। भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले धन्वंतरि की आराधना से शरीर में नई ऊर्जा, मानसिक शांति और दीर्घायु प्राप्त होती है।
Dhanvantari Chalisa के पाठ से मिलने वाले लाभ
- नियमित रूप से धन्वंतरि चालीसा पढ़ने से पुराने और नए रोगों से मुक्ति मिलती है।
- भगवान धन्वंतरि की कृपा से दीर्घायु और निरोगी शरीर का आशीर्वाद मिलता है।
- चालीसा का पाठ मन को शांति देता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
- धनतेरस के दिन चालीसा पढ़ने से घर में लक्ष्मी का आगमन होता है।
- यह चालीसा शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ रखने का अद्भुत साधन है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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