Dev Uthani Ekadashi 2024 Wishes: 'हर ओर मंगल ही मंगल हो', अपनों को भेजें ये खास संदेश
Dev Uthani Ekadashi 2024 Wishes: हिंदू पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के चार माह के योग निद्रा से जागरण के रूप में देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इसी दिन से शुभ कार्यों का आरंभ होता है।
आइए इस पवित्र अवसर पर अपनों को शुभकामनाएं भेजें और भगवान विष्णु की आराधना करें...

देवउठनी एकादशी शुभकामनाएं (Dev Uthani Ekadashi 2024 Wishes)
- 'भगवान विष्णु आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करें', हैप्पी देवउठनी एकादशी!
- 'देवों के जागृत होने के इस पावन अवसर पर आप सभी को शुभकामनाएं', शुभ देवउठनी एकादशी!
- 'भगवान विष्णु का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहे। हर मनोकामना पूर्ण हो', हैप्पी देवउठनी एकादशी!
- 'देवउठनी एकादशी का पावन पर्व आपके जीवन में नई उमंग और प्रेरणा लेकर आए', हैप्पी देवउठनी एकादशी!
- 'हर ओर मंगल ही मंगल हो'. हैप्पी देवउठनी एकादशी!
- "हर दिल में बसे भगवान विष्णु, हैप्पी देवउठनी एकादशी!
- "देवउठनी एकादशी का दिन है शुभ कार्यों की शुरुआत का। हैप्पी देवउठनी एकादशी!
- "भगवान विष्णु के आशीर्वाद से आपका हर दिन मंगलमय हो। शुभ देवउठनी एकादशी!
देवउठनी एकादशी आरती (श्री विष्णु जी की आरती)
- ॥ ऊं जय जगदीश हरे आरती॥
- ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
- भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे।
- जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।
- सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे।
- मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
- तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ओम जय जगदीश हरे।
- तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
- स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ओम जय जगदीश हरे।
- तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।
- किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे।
- दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
- अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ओम जय जगदीश हरे।
- विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।
- श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ओम जय जगदीश हरे।
- श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।
- कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ओम जय जगदीश हरे।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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