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Chhath Puja 2023 : कब है खरना? क्यों बनाया जाता है मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद?

Chhath Puja 2023 ( कब है खरना?): छठ पूजा का दूसरा दिन खरना का होता है, इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक व्रत रख जाता है। सूर्यास्त बाद उपवास करने वाले लोग गुड़, चावल की खीर और गेंहू के आटे की रोटी के खाकर व्रत तोड़ते हैं। ये खाना मिट्टी के नये चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया जाता है। आज से छठ पर्व की शुरुआत हो गई है तो इसका अर्थ ये हुआ कि खरना 18 नवंबर यानी कि शनिवार को है।

Kharna 2023

मालूम हो कि एक बार अगर चूल्हे पर व्रत का खाना बन गया है तो उसका प्रयोग दोबारा से नहीं किया जाता है। मिट्टी और लकड़ी दोनों ही शुद्द मानी जाती है इसी वजह से इनका प्रयोग इस व्रत में किया जाता है।

प्रसाद ग्रहण करने के बाद शुरू होता है 36 घंटे का निर्जला व्रत

इस व्रत को खाने के बाद ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ होता है, जो कि उषाकाल के अर्ध्य देने के बाद ही टूटता है। इस पूजा के दौरान इंसान को केवल तन से ही नहीं मन से भी सात्विक होने की जरूरत होती है इसलिए इस दौरान मन को शुद्द करने के लिए इंसान को सूर्यदेव औऱ छठी मईया का ध्यान करना चाहिए और भजन सुनना चाहिए।

सूर्यदेव की आरती

  • ऊँ जय सूर्य भगवान,
  • जय हो दिनकर भगवान ।
  • जगत् के नेत्र स्वरूपा,
  • तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
  • धरत सब ही तव ध्यान,
  • ऊँ जय सूर्य भगवान ॥
  • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
  • सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,
  • श्वेत कमलधारी ।
  • तुम चार भुजाधारी ॥
  • अश्व हैं सात तुम्हारे,
  • कोटी किरण पसारे ।
  • तुम हो देव महान ॥
  • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
  • ऊषाकाल में जब तुम,
  • उदयाचल आते ।
  • सब तब दर्शन पाते ॥
  • फैलाते उजियारा,
  • जागता तब जग सारा ।
  • करे सब तब गुणगान ॥
  • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
  • संध्या में भुवनेश्वर,
  • अस्ताचल जाते ।
  • गोधन तब घर आते॥
  • गोधुली बेला में,
  • हर घर हर आंगन में ।
  • हो तव महिमा गान ॥
  • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
  • देव दनुज नर नारी,
  • ऋषि मुनिवर भजते ।
  • आदित्य हृदय जपते ॥
  • स्त्रोत ये मंगलकारी,
  • इसकी है रचना न्यारी ।
  • दे नव जीवनदान ॥
  • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
  • तुम हो त्रिकाल रचियता,
  • तुम जग के आधार ।
  • महिमा तब अपरम्पार ॥
  • प्राणों का सिंचन करके,
  • भक्तों को अपने देते ।
  • बल बृद्धि और ज्ञान ॥
  • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
  • भूचर जल चर खेचर,
  • सब के हो प्राण तुम्हीं ।
  • सब जीवों के प्राण तुम्हीं ॥
  • वेद पुराण बखाने,
  • धर्म सभी तुम्हें माने ।
  • तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
  • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
  • पूजन करती दिशाएं,
  • पूजे दश दिक्पाल ।
  • तुम भुवनों के प्रतिपाल ॥
  • ऋतुएं तुम्हारी दासी,
  • तुम शाश्वत अविनाशी ।
  • शुभकारी अंशुमान ॥
  • ॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
  • ऊँ जय सूर्य भगवान,
  • जय हो दिनकर भगवान ।
  • जगत के नेत्र रूवरूपा,
  • तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ॥
  • धरत सब ही तव ध्यान,
  • ऊँ जय सूर्य भगवान ॥

डिसक्लेमर- यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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