Chhath Puja 2021: उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके हुआ 'छठ' महापर्व का समापन
नई दिल्ली, 11 नवंबर। आस्था के महापर्व 'छठ' के चौथे दिन गुरुवार सुबह लोगों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। इसी के साथ चार दिन तक चलने वाले इस पर्व का आज समापन हो गया। श्रद्धालुओं ने सुबह-सुबह ही घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। जिसके बाद उपवास रखने वाले व्रतियों ने छठ मैया का प्रसाद ग्रहण कर व्रत तोड़ा। आपको बता दें छठ पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सूर्यदेव की कृपा और छठ मैया का प्रेम-आशीष पाना है। सूर्य की कृपा से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है तो वहीं छठ मैया के आशीष से इंसान को सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

छठ अकेली ऐसी पूजा है, जिसमें उगते हुए और अस्त होते हुए सूर्य की पूजा की जाती है। अस्त होता सूरज जहां आपको कालचक्र के बारे में बताता है तो वहीं उगता सूरज नई सोच और ऊर्जा का प्रतीक है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए इन दोनों चीजों का होना बहुत ज्यादा जरूरी है। आपको बता दें कि आम से लेकर खास तक सभी ने पूरी श्रद्धा के साथ छठ पूजा की और अपने परिवार की खुशहाली के लिए सूर्य भगवान और छठ मैया से प्रार्थना की।
मालूम हो कि छठ पर्व आपको संयम, प्रेम, तपस्या और प्रकृति से जुड़ने की सीख देता है। छठ पर्व के चलते लोग घाटों-जलाशयों की सफाई करते हैं, जो कि स्वस्थ वातावरण के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। यही नहीं सूर्य को अर्घ्य घुटने तक पानी में खड़े होकर दिया जाता है, जो कि आपके शरीर के रोगों को दूर करता है। जल-चिकित्सा में यह ह्यकटिस्नानह्ण कहते हैं। सूर्य की रोशनी से कीटों और रोगों का अंत होता है। सूर्य की रोशनी हड्डियों के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। इसलिए ये व्रत स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। छठ पर्व का जिक्र आदिग्रंथ ऋग्वेद में भी मिलता है।












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