Chaturmas 2022: चातुर्मास में जप से शुद्ध होगी आत्मा, जागेगी आध्यात्मिक चेतना
नई दिल्ली , 11 जुलाई। चातुर्मास में मौन और संयम का जितना महत्व है, उतना ही महत्व जप का भी है। चातुर्मास के चार मास में मन, आत्मा और शरीर की शुद्धि के लिए संयमित जीवन जीने का निर्देश शास्त्रों में दिया गया है। इस अवधि में अपने ईष्ट देव, गुरु आदि का जप करने से पुण्यों का उदय होता है और भाग्य प्रबल होता है। यही कारण हैं कि संत-मुनि आदि चातुर्मास के समय में एक स्थान पर निवास करते हुए जप-ध्यान में लीन रहते हैं। गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं यज्ञों में मैं जप यज्ञ हूं। इस कलियुग में केवल जप ही ईश्वर का सामीप्य देने में सक्षम है।

जप किसी मंत्र अथवा ईश्वर के नाम का बार-बार उच्चारण करने को कहते हैं। यह किसी भी देवी-देवता का मंत्र या अपने ईष्ट देव का नाम हो सकता है। या अपने गुरु के मुख से प्राप्त मंत्र हो सकता है। जप हमारी विचारधारा को सांसारिक वस्तुओं की ओर जाने से रोकता हे। वह हमारे अंत:करण को ईश्वर की ओर प्रेरित करता है तथा अनंत आनंद और सुख की प्राप्ति करवाता है। जप करते समय हमारे भीतर आध्यात्मिक चेतना का उत्थान होता है, भागवत गुणों का स्रोत प्रवाहित होने लगता है। जप से अंत:करण शुद्ध और सात्विक होता है।
कौन-सा मंत्र चुनें
जप के लिए मंत्र चुनना कठिन कार्य नहीं है। यदि आपने किसी गुरु से दीक्षा ली है तो उनके मुख से आपको मंत्र प्राप्त हुआ होगा। वही सर्वश्रेष्ठ मंत्र होता है। यदि आपका कोई गुरु नहीं है तो अपने ईष्ट देव के मंत्र या नाम का ही जप कर सकते हैं। ईष्ट देव वह होता है जिसका नाम अनायास ही संकट के समय आपके मुख से निकलता है। या जिस देवी या देवता की ओर आपका सहज ही झुकाव होता है, जिनकी आप नित्य पूजा करते हैं वही आपका ईष्ट देव होगा। यदि इसमें भी कठिनाई है तो कोई योग्य ज्योतिषी आपकी कुंडली देखकर आपके ईष्ट देव का निर्धारण कर देगा। उसी के नाम अथव मंत्र का जप करें।
कैसे करें जप
जप प्रतिदिन नित्य एक ही समय पर एक ही स्थान पर बैठकर करना चाहिए। जप करने के लिए श्रेष्ठ दिशा उत्तर होती है क्योंकिआप उत्तर की ओर मुख करके सहज रूप से हिमालय के योगियों के संपर्क में आ सकते हैं। जप करते समय अपना ध्यान उस मंत्र या देव के नाम पर केंद्रित रखें। प्रारंभ में यह कठिन प्रतीत होगा किंतु अभ्यास से ध्यान लगने लगेगा। जप करते समय आंखें खुली रखकर अपने मंत्र के देवता पर दृष्टि जमा रख सकते हैं। यदि आंखें बंद करके जप कर रहे हैं तो अपनी भ्रकुटि के मध्य में ध्यान लगाते हुए जप करें।












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