• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

Chaitra Purnima 2019: चैत्र पूर्णिमा 19 अप्रैल को, जानिए पूजा का शुभ मूहुर्त

By Pt. Gajendra Sharma
|

नई दिल्ली। नव संवत्सर की पहली पूर्णिमा चैत्र पूर्णिमा होती है। स्थानीय भाषाओं में इसे चैती पूनम भी कहा जाता है। हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा होने के कारण इसका महत्व काफी अधिक है। इस पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान, दान, पुण्य आदि का बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने का विधान है, साथ ही इस दिन हनुमान जयंती होने के कारण इस दिन की गिनती विशेष पर्वों में की जाती है। चैत्र पूर्णिमा पर व्रत रखकर रात में चंद्रमा की पूजा की जाती है। शास्त्रों का कथन है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन किया गया व्रत हजारों यज्ञों के समान पुण्यदायी होता है। इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा का व्रत 19 अप्रैल को किया जाएगा। चैत्र पूर्णिमा व्रत करने से जातक का भाग्य चमकता है।

चैत्र पूर्णिमा का व्रत कैसे करें

चैत्र पूर्णिमा का व्रत कैसे करें

चैत्र पूर्णिमा पर स्नान, दान, हवन, व्रत और मंत्र जप किए जाते हैं। इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है। सत्यनारायण कथा की जाती है और जरूरतमंदों, गरीबों, निश्ाक्तों को भोजन, वस्त्र आदि दान किए जाते हैं। चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, जलाशय, कुएं या बावड़ी में स्नान करें। इसके बाद सूर्य मंत्र ऊं घृणि: सूर्याय नम: का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसी समय व्रत का संकल्प लेकर भगवान सत्यनारायण की पूजा करें। रात्रि में चंद्रमा की पूजा करके जल का अर्घ्य दें। पूजा के किसी जरूरतमंद को कच्चे अनाज से भरा हुआ घड़ा दान किया जाता है।

कृष्ण ने रचाया था रास

चैत्र पूर्णिमा का महत्व भगवान कृष्ण से भी जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार चैत्र पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में गोपियों के साथ रास उत्सव मनाया था। जो महारास के नाम से प्रसिद्ध है। इस महारास में हजारों गोपियां शामिल होती थीं और प्रत्येक गोपी के साथ भगवान श्रीकृष्ण रातभर नृत्य करते थे।

चैत्र पूर्णिमा व्रत के लाभ

चैत्र पूर्णिमा व्रत के लाभ

  • चैत्र पूर्णिमा पर सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है। सारे रोग दूर होते हैं। त्वचा और नेत्र संबंधी रोग ठीक होते हैं।
  • इस दिन गायों को चारा खिलाने, बंदरों को चने खिलाने और मछलियों, चीटियों को आटा खिलाने से व्यक्ति को कभी रोग, दुर्घटना और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
  • चैत्र पूर्णिमा को भाग्योदयकारक माना गया है। इस दिन गरीबों को भोजन करवाने से जातक के भाग्य की रूकावटें दूर होती हैं।
  • इस दिन सायंकाल के समय पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करते हुए उसके तने में कच्चा सूत लपेटें। परिक्रमा करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का मानसिक जाप करते रहें। परिक्रमा के बाद पेड़ में एक लोटा जल अर्पित करें फिर एक लोटा कच्चा दूध चढ़ाएं। इससे घर-परिवार से संकटों का नाश होता है और आर्थिक स्थिति जबर्दस्त तरीके से मजबूत होती है।

यह भी पढ़ें: जानिए... वक्री गुरु का कुंडली के अलग-अलग भावों में क्या होता है असर

चैत्र पूर्णिमा तिथि

चैत्र पूर्णिमा तिथि

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 18 अप्रैल को : सायं 7.26 बजे से
  • पूर्णिमा तिथि पूर्ण 19 अप्रैल को : सायं 4.41 बजे तक

यह भी पढ़ें: जोड़े से पूजा करते समय इन बातों का ध्यान रखें, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
It is observed on the day of the full moon in the month of Chaitra, Read pooja date, Time and Subh Muhurat.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X