Maa Kushmanda: मां कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र, आरती और भोग
Maa Kushmanda ki Puja: मां दुर्गा का चौथा रूप कूष्मांडा का है, उनका ये रूप काफी सुंदर है, अलौकिक और मोहक है। जो कोई भी इनकी पूजा सच्चे मन से करता है, उसकी हर मुराद तो पूरी ही होती है, साथ ही व्यक्ति को आरोग्य, समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है।
क्यों हैं कूष्मांडा नाम? (Maa Kushmanda)
माना जाता है कि मां के चौथे रूप ने ही अपनी दिव्य मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें 'कूष्मांडा' कहा जाता है। इनकी आराधना से जीवन में सकारात्मकता आती है और मनुष्य का आत्मबल बढ़ जाता है। उसके अंदर का भय समाप्त हो जाता है।

पूजा विधि (Maa Kushmanda)
- प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें ।
- पूजा स्थल पर मां कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- फूल, अक्षत, कुमकुम, चंदन, धूप, दीप, गंध, नारियल, मिठाई, पंचामृत चढ़ाएं।
- मां कूष्माण्डा के मंत्रों का जप करें और ध्यान करें।
- मां को विशेष रूप से मालपुए का भोग लगाएं।
- मां की आरती करें और प्रसाद बांटें।
मंत्र (Maa Kushmanda)
- ध्यान मंत्र:या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
- बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः।।
- स्तोत्र मंत्र:सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे।।
आरती (Maa Kushmanda)
- जकूष्मांडा जय जग सुखदानी।
- मुझ पर दया करो महारानी॥
- पिगंला ज्वालामुखी निराली।
- शाकंबरी मां भोली भाली॥
- लाखों नाम निराले तेरे ।
- भक्त कई मतवाले तेरे॥
- भीमा पर्वत पर है डेरा।
- स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
- सबकी सुनती हो जगदंबे।
- सुख पहुंचती हो मां अंबे॥
- तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
- पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
- मां के मन में ममता भारी।
- क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
- तेरे दर पर किया है डेरा।
- दूर करो मां संकट मेरा॥
- मेरे कारज पूरे कर दो।
- मेरे तुम भंडारे भर दो॥
- तेरा दास तुझे ही ध्याए।
- भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बात करें।












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