Chaitra Navratri 2024 Day 9: राम नवमी पर जरूर करें ये काम वरना नष्ट हो जाएगा वैभव
Maa Siddhidatri and Shree Ram ki Aarti: चैत्र नवरात्रि के 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है और आज ही के दिन प्रभु श्री राम का जन्मदिन भी है, जिसे कि लोग राम नवमी के रूप में मनाते हैं।

आज के दिन जो कोई भी सच्चे मन से प्रभु राम और माता दुर्गा की पूजा सच्चे मन से करता है, उसे हर तरह की खुशी की प्राप्ति होती है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसके यश और पैसे में वृद्धि होती है।
आज के दिन हर किसी को मां दुर्गा और प्रभु राम की विशेष आरती के साथ करनी चाहिए, ऐसा करने से आपके घर में कभी सुख-शांति और वैभव की कमी नहीं होगी लेकिन अगर आज आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो आपको आर्थिक रूप से नुकसान पहुंच सकता है।
मां सिद्धिदात्री की आरती ( Maa Siddhidatri Aarti)
- जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
- तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
- तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
- तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
- कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
- जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
- तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
- तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
- रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
- तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
- तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
- कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
- तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
- रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
- सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
- जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
- हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
- महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
- मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
- वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!
श्री राम की आरती ( Shree Ram ki Aarti)
- भगवान श्री राम की आरती
- श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
- नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
- कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
- पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
- भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
- रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
- सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
- आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
- इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
- मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
- छंद
- मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
- करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
- एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
- तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
- ।।सोरठा।।
- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
- मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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