जानिए उन ऊंटों के बारे में जो भारत-पाक बॉर्डर पर करते हैं गश्त
नई दिल्ली। इस बार का गणतंत्र दिवस काफी खास है क्योंकि इस बार काफी चीजें हमारी 26 जनवरी को नई होने वाली हैं। इस बार आपको राजपथ की परेड पर ऊंटों की टुकड़ी की भी दिखायी देगी। बीएसफ की इस खास परेड के लिए काफी तैयारियां की जा रही हैं। इसलिए कड़कड़ाती ठंड में ऊंटों की टुकड़ी ने खास अंदाज में परेड के लिए रिहर्सल की।
जानिए गणतंत्र दिवस से जुड़ी कुछ रोचक बातें
इस खास परेड के बारे में और बातें जानते हैं नीचे की स्लाइडों में इसलिए प्लीज click..

ऊंटों का दस्ता
सीमा सुरक्षा बल की पहचान ऊंटों का दस्ता से ही होती है।

रंग-बिरंगे दस्ते
ऊंटों के रंग-बिरंगे दस्ते का कोई जवाब नहीं होता है। करीब 40 सालों से यह ऊंट दस्ता परेड में शामिल होकर गणतंत्र दिवस की रौनक बढ़ाता रहा है।

इकलौता ऊंट दस्ता
दुनिया का यह इकलौता ऊंट दस्ता है जो न केवल बैंड के साथ राजपथ पर प्रदर्शन करता है बल्कि सरहद पर रखवाली भी करता है।

पहली बार 1976 में
90 ऊंटों की टुकड़ी पहली बार 1976 में गणतंत्र दिवस का हिस्सा बनी थी, जिसमें 54 ऊंट सैनिकों के साथ और शेष बैंड के जवानों के साथ थे।

ऊंटों का दल
बीएसएफ देश का अकेला ऐसा फोर्स है, जिसके पास अभियानों और समारोह दोनों के लिए सुसज्जित ऊंटों का दल है।

इंडो-पाक बार्डर
बीएसएफ के जवान इंडो-पाक बार्डर पर गश्त के लिए ऊंटों का प्रयोग करते हैं।

बिना पानी के
रेगिस्तान में बिना पानी के ऊंट काफी रह सकता है इसलिए इनका प्रयोग बीएसएफ वाले करते हैं।

विशेष ट्रेनिंग
इन ऊंटों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।

विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल
सीमा सुरक्षा बल यानि कि बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल है।

1 दिसम्बर 1965
जिसका गठन 1 दिसम्बर 1965 में हुआ था।

188 बटालियन
इस समय बीएसएफ की 188 बटालियन है और यह 6,385.36 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करती है जो कि पवित्र, दुर्गम रेगिस्तानों, नदी-घाटियों और हिमाच्छादित प्रदेशों तक फैली है।













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