Baglamukhi Jayanti 2025: जीवन में चाहिए शांति, शक्ति और सुख तो आज जरूर करें ये उपाय
Baglamukhi Jayanti 2025: आज पूरे देश में बगलामुखी जयंती मनाई जा रही है। बगलामुखी देवी का स्थान तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं और इन्हें स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है। स्तंभन का अर्थ होता है- रोक देना।

अतः देवी बगलामुखी की साधना शत्रु को वश में करने, उसकी वाणी, गति, निर्णय शक्ति को रोकने एवं अपने जीवन में शांति, विजय, और आत्मबल प्राप्त करने के लिए की जाती है। आज के दिन देवी के विशिष्ट मंत्रों का जाप करके, पूजा करके अपने जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है।
बगलामुखी देवी के प्रमुख मंत्र (Baglamukhi Jayanti 2025)
बगलामुखी साधना में मंत्रों का विशेष महत्व होता है। इन मंत्रों का नियमित जाप, अनुष्ठान और हवन विशेष फलदायी होते हैं। हालांकि देवी की साधना अपने गुरु के सान्निध्य में ही करनी चाहिए क्योंकि जरा सा गलत हो जाने पर इसके विपरीत प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। कुछ प्रमुख बगलामुखी मंत्र इस प्रकार हैं:
1. बीज मंत्र - ॐ ह्लीं
यह अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्र है जो साधना का मूल आधार है। ह्लीं को बगलामुखी बीज कहा जाता है।
2. मूल मंत्र- ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा
यह मंत्र शत्रु की बुद्धि, वाणी, शक्ति को स्तम्भित कर उसे निष्क्रिय करने के लिए जाप किया जाता है। मंत्र जाप में शारीरिक और मानसिक शुद्धता होना अत्यंत आवश्यक है।
3. स्तोत्रात्मक मंत्र
ॐ ऐं ह्लीं क्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय कीटं मूषकं चूर्णय चूर्णय मारय मारय शोषय शोषय मंथय मंथय उद्पाटय उद्पाटय ह्लीं ऐं क्लीं ॐ फट्।
यह मंत्र गहन तांत्रिक प्रयोगों के लिए होता है, जो विशेष सिद्धि साधकों द्वारा प्रयोग किया जाता है। इस मंत्र की साधना गुरु के मार्गदर्शन में ही की जानी चाहिए।
बगलामुखी देवी का पूजा एवं हवन की विधि (Baglamukhi Jayanti 2025)
बगलामुखी पूजा सामान्यतः किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में की जाती है। परन्तु सामान्य श्रद्धालु भी साधारण विधि से इनकी पूजा कर सकते हैं। यदि आप दतिया, नलखेड़ा या कांगड़ा मंदिर में दर्शन करने जाते हैं तो वहां योग्य विद्वान पंडित आपको विधि विधान से हवन आदि करवा देते हैं।
पूजा सामग्री (Baglamukhi Jayanti 2025)
पीला वस्त्र एवं पीला आसन, हल्दी की माला, पीले फूल (गेंदे या कनेर), हल्दी, चना दाल, बेसन लड्डू, पीले फल, हवन कुंड, आम की लकड़ी, गाय का घी, हवन सामग्री, नवग्रह समिधा आदि।
पूजा विधि
- सुबह स्नान कर पीले वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।
- देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उन्हें पीले फूल अर्पित करें।
- दीपक जलाकर "ॐ ह्लीं" बीज मंत्र से ध्यान करें।
- 108 बार मूल मंत्र का जप करें (हल्दी माला से)।
- प्रसाद अर्पण करें।
हवन विधि
हवन पूजा में देवी को आहुति दी जाती है। यह अत्यंत प्रभावशाली प्रक्रिया है। एक चौकी या भूमि पर हवन कुंड स्थापित करें आम की समिधा से अग्नि प्रज्वलित करें। गाय के घी में हल्दी और चना दाल मिलाकर हवन सामग्री तैयार करें। प्रत्येक मंत्र के अंत में "स्वाहा" बोलकर हवन सामग्री अर्पित करें।
हवन मंत्र:
- ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा
- इस मंत्र से कम से कम 108 आहुतियां दें। यदि पूर्ण अनुष्ठान करना चाहें तो 1,250 आहुतियां देना श्रेष्ठ माना जाता है।
महत्वपूर्ण सावधानियां
- बगलामुखी साधना अत्यंत शक्तिशाली होती है, इसलिए बिना गुरु के गहरे तांत्रिक प्रयोगों से बचें।
- इस साधना में मन, वचन और कर्म की पवित्रता आवश्यक होती है।
- इस साधना को हानि पहुंचाने के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए, अन्यथा साधक पर ही प्रभाव लौट सकता है।












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