Ashadha Amavasya 2023: आषाढ़ी अमावस्या आज, इन तीन कार्यों से जीवन में आएगी समृद्धि

Ashadha Amavasya 2023: आषाढ़ मास की अमावस्या का शास्त्रों में बड़ा महत्व बताया गया है। इसे आषाढ़ी अमावस्या कहते हैं। 18 जून 2023 रविवार को आ रही आषाढ़ी अमावस्या के दिन तीन ऐसे कार्यों के बारे में आपको जानकारी दे रहा हूं जिन्हें करने से आपके जीवन में कभी बड़ा संकट नहीं आएगा।पारिवारिक कटुता, क्लेश, आर्थिक संकट, रोग, दुर्घटना, कार्य अटकने जैसी चीजें कभी आपके साथ नहीं होगी।

आइए जानते हैं क्या हैं वे तीन उपाय-

Ashadha Amavasya 2023

अमावस्या तिथि 17 जून को प्रात: 9 बजकर 10 मिनट से प्रारंभ होकर 18 जून को प्रात: 10 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। चूंकि पितृ कार्य मध्याह्न काल से पूर्व किए जाते हैं इसलिए पितरों जुड़े कार्य श्राद्ध, तर्पण आदि तो 17 जून को ही कर लिए जाएंगे किंतु स्नान-दान जैसे कार्य सूर्योदय व्यापिनी अमावस्या में 18 जून को किए जाएंगे। इसलिए 18 जून को पवित्र नदियों के जल से स्नान करके ब्राह्मणों का पूजन कर, उन्हें भोजन करवाकर यथोचित दान-दक्षिणा दें।

आज जरूर करें ये तीन काम

अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व होता है। इसमें पितरों का वास होता है। दोपहर 12 बजे के पूर्व पीपल के वृक्ष की जड़ को मीठे कच्चे दूध में जल मिलाकर सींचें। फिर उसी वृक्ष के नीचे बैठकर विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। सायंकाल पुन: उसी वृक्ष के समीप जाएं और उसके नीचे आटे के पांच दीपक में सरसों का तेल भरकर उसमें थोड़ी सी काली तिल डालकर प्रज्जवलित करें। पेड़ की जड़ से थोड़ी सी मिट्टी खोदकर लाएं और उसे पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें। इससे आपको कभी धन की तंगी नहीं होगी और कामकाज खूब फलेगा-फूलेगा।

दूसरा प्रयोग हनुमानजी से जुड़ा है

आषाढ़ी अमावस्या का दूसरा प्रयोग हनुमानजी से जुड़ा हुआ है। आज प्रात: स्नानादि करके लाल रंग के साफ स्वच्छ वस्त्र पहनकर हनुमान मंदिर जाएं। हनुमानजी की मूर्ति के दाहिने पैर के अंगूठे से थोड़ा सा सिंदूर लेकर चुपचाप अपने घर आ जाएं। इस सिंदूर से घर की बाहरी चारों दीवारों पर हं लिख दें। चारों दीवार न हो तो जितनी दीवारें हों उन पर लिख दें। ऐसा करने से आपका परिवार शत्रुओं से सुरक्षित रहेगा, रोग शोक आपके घर में फटकेगा भी नहीं।

शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें

आषाढ़ी अमावस्या के दिन काले पत्थर के शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। इससे नाग दोष, कालसर्प दोष, पितृ दोष, ग्रहण दोष और समस्त प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है। भाग्य प्रबल होता है और भाग्य के मार्ग में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। इससे जीवन में समस्त सुख-सुविधाएं सहज ही मिलने लगती हैं।

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