Apara Ekadashi 2023: अपरा एकादशी तिथि,मंत्र, आरती और महत्व

Apara Ekadashi 2023: एकादशी के दिन गरीबों को दान करने और पंडितों को भोजन कराने से इंसान को यश की प्राप्ति होती है और तरक्की मिलती है।

Apara Ekadashi 2023

Apara Ekadashi 2023: ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी 15 मई यानी कि सोमवार को है, जिसे कि अचला एकादशी भी कहा जाता हा। अगर आप इस दिन भगवान विष्णु की खास पूजा विशेष मंत्रों और आरती के साथ करें तो आपकी किस्मत चमक जाएगी। आपको घर में हर तरह के सुख का वास होगा। आपको धन वैभनव की प्राप्ति होगी और आपका घर-आंगन हमेशा हर भरा रहेगा।

ये है एकादशी मंत्र

  • ॐ अं वासुदेवाय नम:
  • ॐ आं संकर्षणाय नम:
  • ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:
  • ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:
  • ॐ नारायणाय नम:
  • ॐ विष्णवे नम:
  • श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
  • ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

श्री विष्णु जी की आरती

  • ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
  • भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
  • जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
  • सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥
  • ॐ जय...॥
  • मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
  • तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
  • ॐ जय...॥
  • तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
  • पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥
  • ॐ जय...॥
  • तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
  • मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
  • ॐ जय...॥
  • तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
  • किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥
  • ॐ जय...॥
  • दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
  • अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
  • ॐ जय...॥
  • विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
  • श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
  • ॐ जय...॥
  • तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
  • तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥
  • ॐ जय...॥
  • जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
  • कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
  • ॐ जय...॥

एकादशी तिथि का समय

  • एकादशी तिथि प्रारंभ 15 मई रात 2:46 AM
  • एकादशी तिथि पूर्ण 16 मई रात 1:03 AM
  • व्रत का पारण 16 मई को सुबह 6:41 से 8:25 AM

एकादशी की आरती

  • तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
  • गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ॥ॐ॥
  • मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
  • शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥ ॐ॥
  • पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
  • शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ॥ ॐ ॥
  • नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
  • शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ॥ ॐ ॥
  • विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
  • पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ॥ ॐ ॥
  • चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
  • नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ॥ ॐ ॥
  • शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
  • नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥ ॐ ॥
  • योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
  • देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ॥ ॐ ॥
  • कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
  • श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥ ॐ ॥
  • अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
  • इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥ ॐ ॥
  • पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
  • रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ॥ ॐ ॥
  • देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
  • पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ॥ ॐ ॥
  • परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी॥
  • शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ॥ ॐ ॥
  • जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
  • जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥ ॐ ॥

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