सीएम योगी के प्रोत्साहन से निर्यातकों ने आपदा को अवसर में बदला, देश में पांचवें स्थान पर बना रहा यूपी

लखनऊ। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई थीं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले प्रोत्साहन के चलते सूबे के कई निर्यातकों ने आपदा को अवसर में बदलने का कार्य किया। इन निर्यातकों के प्रयासों से ही चावल, खिलौने, दवाई, कालीन, सिल्क, उर्वरक, मछली उत्पाद, चीनी और कृत्रिम फूल जैसे सामानों के विदेशों से खूब आर्डर मिले। और यूपी निर्यात के मामले में देश में अपने पांचवे स्थान को बनाये रखने में सफल रहा। अब प्रदेश सरकार इस स्थान से ऊपर पहुचने की मंशा रखती हैं। ऐसे जल्दी ही सरकार सूबे के निर्यात को बढ़ावा देने संबंधी कई फैसले लेगी। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार उद्यमियों को कई तरह की रियायतें भी दे सकती है। ताकि राज्य के तमाम उत्पादों को विदेशों में आसानी से भेजा जा सके।

UP retained fifth position in export in India

केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों से हुए निर्यात के जारी किये गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार कोरोनाकाल में निर्यात के मामले में उत्तर प्रदेश ने तेलंगाना, उडीसा, केरल, कर्नाटक, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब जैसे कई राज्यों को पीछे छोड़ दिया। केंद्र सरकार के इन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में अप्रैल से नवंबर में उत्तर प्रदेश से 72,508 करोड़ रूपये का सामान निर्यात किया गया। जबकि कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन में कुछ महीने उत्पादन पूरी तरह से ठप्प था, इसके बाद भी यूपी से चावल, चीनी, दूध, आटा, प्लास्टिक उत्पाद, सिल्क, कृत्रिम फूल जैसे सामानों का के विदेशों से खूब निर्यात किया गया। नेपाल, बंगालदेश और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों ने कोरोना काल के दौरान यूपी से बड़ी संख्या ओडीओपी उत्पाद मनवायें।

इस साल अप्रैल से नवंबर तक विभिन्न राज्यों से हुए निर्यात के केंद्र द्वारा जारी किये गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश से विदेशों में 2064.10 करोड़ रुपये के चीनी तथा चीनी से बने उत्पादों का निर्यात किया गया। जबकि बीते साल 841.22 करोड़ रुपये के ही चीनी तथा चीनी से बने उत्पादों का निर्यात हुआ था। इसी प्रकार इस साल अप्रैल से नवंबर तक आटा, बेकरी और दूध के निर्यात में भी बीते साल के मुकाबले दुगना इजाफा हुआ। राज्य से इस साल अप्रैल से नवंबर तक 79.52 करोड़ रूपये के आटा, बेकरी और दूध उत्पाद का निर्यात किया गया। प्लास्टिक उत्पादों में 11 प्रतिशत का इजाफा बीते वर्ष के मुकाबले हुआ। अनाज के निर्यात में 83 प्रतिशत का इजाफा इस साल हुआ पाया गया। इस साल अप्रैल से नवंबर तक 1054.20 करोड़ रुपये का अनाज निर्यात किया गया। बीते साल 949.49 करोड़ रुपये का अनाज निर्यात हुआ था।

विदेशों में निर्यात किए गए जो अनाज में चावल ही अधिक मंगवाया गया है। निर्यात से जुड़े कारोबारियों के अनुसार यूपी में उगाए जाने वाले ब्लैक राइस (काला चावल) की मांग विदेशों में लगातार बढ़ रही है। यूपी के चंदौली के लिए काला चावल अब विदेशों में अपनी पहचान बना चुका है। विदेशों में इस चावल के मुरीदों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

किसानों ने तीन साल पहले एक्सपेरिमेंट के तौर पर चंदौली में इसको उगाना शुरू किया गया था। अब काले चावल की मांग विदेशों से खूब हो रही है। यूपी के मिर्ज़ापुर में भी किसान इसकी खेती कर रहे हैं। बासमती के साथ इस चावल को साउथ ईस्ट एशिया के देशों में कोरोना काल के दौरान निर्यात किया गया। यूपी से करीब 68 उत्पाद विदेशों में भेजे जाते हैं। जिसमें से इस साल अप्रैल से नवंबर तक मांस के निर्यात में 2.58 प्रतिशत की कमी आयी क्योंकि लॉकडाउन के चलते स्लाटरहाउस बंद थे। इसी तरह चर्म उत्पाद, सीमेंट, स्टोन आदि में भी कमी आयी है।

फिलहाल अब निर्यात बढ़ने लगा है। सरकार भी इस गति को तेज करने के लिए सरकार नई निर्यात नीति आयी है। जिसके तहत सरकार निर्यातकों की संख्या और बढ़ाने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। अभी राज्य में करीब 10 हजार निर्यातक हैं। इनकी संख्या में इजाफा किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश ने मेक इन यूपी ब्रांड विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है। हर जिले को निर्यात हब के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। सरकार निर्यातकों को कई सहूलियतें दिए जाने पर विचार कर रही है। जल्दी ही मुख्यमंत्री इस संबंध में फैसला लेंगे।

तीन सालों में निर्यात बढ़ा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से राज्य के निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। 2017-18 में राज्य से 88967.42 करोड़, 2018-19 में 114042.72 करोड़ तथा 2019-20 में राज्य से 120356.26 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। जबकि इससे पूर्व 2016-17 में राज्य से कुल निर्यात का ग्राफ 83999.92 करोड़ रुपये था। कोरोना के कारण उत्पन्न बाधाओं के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में पिछले वर्ष के कुल निर्यात के बराबर निर्यात हो जाने की उम्मीद निर्यात के कार्यरत निर्यातकों को है।

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